नोटबंदी ने हिंसाग्रस्त कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी पर ब्रेक लगा दी है। 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद उपद्रव के आकाओं के पास पत्थरबाजों को दिहाड़ी देने के पैसे नहीं हैं। लिहाजा, अमन बहाली को गति मिल गई है।
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नोटबंदी से पत्थरबाजों का नेटवर्क ध्वस्त हो गया है। बंद समर्थकों के हौसले पस्त हैं। शनिवार को तो घाटी पूरी तरह शांत रही। उपद्रव और हिंसा के पीछे काला धन और नकली करेंसी के खेल का सारा ताना बाना बिखर चुका है।
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पाकिस्तान से आई नकली करेंसी की खेप बेकार साबित हो रही है। दिहाड़ी नहीं मिलने के कारण पत्थरबाजों ने किनारा कर लिया है।
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पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह कहते हैं कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने से आतंकवाद की जड़ कटेगी। आतंकियों को फंडिंग रुकने से घाटी सहित पूरे भारत में देश विरोधी गतिविधियों को रोकने में सफलता मिलेगी।
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अब तक काला धन और नकली करेंसी से आतंकवाद फलता- फूलता रहा है। अब आतंक को खाद-पानी मिलना बंद हो रहा है। कश्मीर घाटी में हिंसा भड़काने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आनलाइन ट्रांजेक्शन का रूट भी अपनाया जा रहा था। एनआईए की जांच में इस बात का खुलासा हो चुका है।
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श्रीनगर में पथराव करते उपद्रवी
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हिंसा के दौरान एनआईए द्वारा कश्मीर में ऐसे सैकड़ों खातों को खंगाला गया है। हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी के परिवार वालों सहित कई अलगाववादी नेताओं से इस मामले में पूछताछ भी की गई है।
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी कई मौकों पर यह कह चुकी हैं कि युवाओं को पत्थरबाजी के लिए भड़काया जा रहा है। इन्हें भड़काने वाले लोगों के परिवार के सदस्य बाहर नौकरी कर मजे से रह रहे हैं।
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घाटी में अमूमन 12-15 हजार करोड़ रुपये की फंडिंग आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान द्वारा की जाती रही है। यह राशि हवाला के जरिये तो यहां पहुंचाई ही जाती रही है।
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साथ-साथ नकली नोटों का भी बड़ा नेटवर्क है। सीमा पार से आतंकी संगठनों के आकाओं द्वारा तथा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से नेपाल तथा बांग्लादेश के रास्ते नकली नोटों की खेप पहुंचाई जाती रही है।