गांदरबल जिले में तुलमुला स्थित क्षीर भवानी मंदिर में रविवार को क्षीर भवानी मेले का आयोजन हुआ। अनंतनाग में शनिवार रात काफिले पर पथराव से नाराज कश्मीरी पंडितों ने रविवार को क्षीर भवानी मंदिर पहुंचीं।
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kheer Bhawani
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इसमें हजारों की संख्या में कश्मीरी पंडितों ने हिस्सा लेकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और राज्य के अमन शांति के लिए प्रार्थना की। शाम के समय दोनों मंदिरों में सामूहिक आरती का आयोजन किया गया।
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mehbooba mufti
- फोटो : Amar Ujala
तुलमुला स्थित क्षीर भवानी के मंदिर में धार्मिक भजन व मंदिर की घंटी की आवाज से शनिवार रात से ही पूरा वातावरण भक्तिमय बन चुका था। रविवार सुबह होते ही चिनार के पेड़ों के बीच स्थित माता क्षीर भवानी मंदिर में कश्मीरी पंडितों का पहुंचना शुरू हो गया।
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लंबी कतार में लगकर कश्मीरी पंडितों ने मंदिर में पूजन किया और झरने में दूध चढ़ाया। शाम तक मंदिर में पूजन करने के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही।
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मान्यता है कि झरने के पानी से कश्मीर के हालात की भी जानकारी मिलती है। पानी का काला होना कश्मीर के लिए अशुभ होने का संकेत माना जाता है। इस वर्ष पानी साफ है और भक्तों के अनुसार घाटी के लिए शुभ संकेत है।
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क्षीर भवानी का मेला सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। इसमें मुसलमानों की तरफ से पूरा सहयोग किया जाता है। तुलमुला में मेले में ज्यादातर फूल और प्रसाद का स्टाल लगाने वाले स्थानीय मुसलमान हैं।
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kheer Bhawani
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क्षीर भवानी मंदिर में सुबह से कश्मीरी पंडितों का परिवार सहित पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह के समय हवन यज्ञ आरंभ हुआ। इसकी पूर्ण आहुति दोपहर के समय डाली गई।
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kheer Bhawani
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लंबी कतार में लगकर श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा की थाली चढ़ाई और साथ ही दूध भी चढ़ाया। मंदिर के बाहर पूरा माहौल मेले जैसा था। कई श्रद्धालुओं ने नि:शुल्क प्रसाद के स्टाल लगाए थे।
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kheer Bhawani
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जहां मंदिर पहुंचने वाले कश्मीरी पंडितों को ठंडा मीठा पानी पिलाने के साथ खाने पीने का सामान प्रसाद के रूप में दिया गया।
माता क्षीर भवानी पीठ के सदस्य व पदाधिकारी सुबह से लेकर रात तक सेवा में जुटे रहे। वहीं शाम के समय मंदिर में सामूहिक आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।