पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर घाटी में हुई पहली मुठभेड़ में बुधवार को आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा के एक दहशतगर्द को मार गिराया गया। ऑपरेशन में एक एसपीओ शहीद हो गया जबकि एक एसआई घायल हुआ है।
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शहीद एसपीओ को आखरी सलामी देते डीजीपी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को रातभर चली मुठभेड़ के बाद आतंकी को मार गिराने में सफलता हासिल हुई। पांच अगस्त के बाद से घाटी में सुरक्षाबलों की तैनाती के साथ-साथ सतर्कता बढ़ गई थी। तब से अब तक न तो कोई आतंकी हमला हुआ और न ही सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ हुई थी। छिटपुट पथराव की घटनाओं को छोड़कर पूरी घाटी में माहौल शांतिपूर्ण रहा।
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शहीद एसपीओ को आखरी सलामी देते डीजीपी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी
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पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मुठभेड़ में एसपीओ बिलाल अहमद और एसआई अमरदीप परिहार घायल हो गए। एसपीओ ने बाद में दम तोड़ दिया और एसआई परिहार बादामीबाग स्थित सेना के 92 बेस अस्पताल में भर्ती हैं। शहीद बिलाल अहमद को सुरक्षा बलों की ओर से श्रद्धांजलि दी गई। उधर, मारे गए आतंकी की शिनाख्त बारामुला निवासी मोमिन गोजरी के रूप में हुई है। लश्कर से जुड़ा यह आतंकी घाटी में कई आतंकी वारदातों में शामिल रहा है। सुरक्षा बलों को काफी समय से इसकी तलाश थी।
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शहीद एसपीओ को आखरी सलामी देते डीजीपी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी
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पुलिस ने बताया कि आतंकियों की मौजूदगी की खुफि या जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों और पुलिस ने मंगलवार की देर रात संयुक्त रूप से तलाशी अभियान शुरू किया था। घेरा सख्त होता देख वहां छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई से मुठभेड़ शुरू हो गई। रातभर चली मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया गया। मुठभेड़ स्थल से हथियार, गोला बारूद तथा अन्य सामग्री बरामद हुई है। प्रवक्ता ने बताया कि स्थानीय लोगों से मुठभेड़ स्थल पर न जाने को कहा गया है क्योंकि वहां अभी विस्फोटक सामग्री होने की आशंका है। क्षेत्र की गहन छानबीन किए जाने और विस्फोटक सामग्री को हटाए जाने तक लोगों से पुलिस के साथ सहयोग करने का अनुरोध किया गया है।
शहीद एसपीओ को आखरी सलामी देते डीजीपी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी
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आतंकियों को अलग-थलग करने तथा उन पर दबाव बनाए रखने के लिए आतंकरोधी अभियान चलता रहेगा। घेराबंदी तथा तलाशी अभियान (कासो) जारी रहेगा। उन पर दबाव कायम रहेगा ताकि वे जनता को गुमराह न कर सकें। - दिलबाग सिंह, डीजीपी