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बाहरी कारीगरों के चले जाने से कश्मीर के हज्जामों की चमकी किस्मत, 20 हजार सैलून बंद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Fri, 23 Aug 2019 12:53 AM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
आपने खूबसूरत दाढ़ी रखे कश्मीरी युवाओं को देखा होगा। इनकी आकर्षक दाढ़ी के पीछे हाथ होता है उन हज्जामों का जो लंबे समय से इनकी देखभाल करते आ रहे हैं। आपको यह आश्चर्य भी हो सकता है कि इनमें अधिकांश उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। इन कामगारों के तसल्ली बख्श काम के कारण स्थानीय लोगों ने इस पेशे से लगभग तौबा कर ली थी। लेकिन पांच अगस्त के बाद बदली परिस्थितियों में कश्मीरी लोगों के पास फिर मौका आया है कि वह इस बाजार पर आधिपत्य स्थापित कर लें। ऐसा अवसर इसलिए आया है कि घाटी में तनाव के चलते बाहर के कारीगर घरों को लौट गए हैं। कश्मीर हेयर ड्रेसर्स एसोसिएशन के अनुसार, घाटी के बाहर के कारीगरों के चले जाने के कारण कम से कम 20000 दुकानें बंद हो गई हैं।
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- फोटो : सोशल मीडिया
पिछले 25 सालों में उत्तर प्रदेश के बिजनौर के हज्जामों का स्थानीय बाजार पर कब्जा है। इनके बीच मुश्ताक अहमद उन शख्सों में शामिल हैं जिन्होंने दूसरे प्रदेश से आए लोगों के बीच अपने काम को जारी रखा। वह बताते हैं कि फिलहाल वह अपने घर से काम कर रहे हैं। कहते हैं कि बाहरी कारीगरों के घाटी से चले जाने के बाद पिछले 17 दिनों से यहां दुकानें बंद हैं। ऐसे में हज्जामों की भारी मांग है। पिछले दस दिनों में उनका कारोबार कई गुना बढ़ गया है।

 

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- फोटो : सोशल मीडिया
मुश्ताक बताते हैं कि कश्मीर में ईद उल अजहा से दस दिन पहले से लोग धार्मिक मान्यताओं के कारण बालों की कटिंग, दाढ़ी बनवाना बंद कर देते हैं। इससे अब ग्राहकों की अचानक भीड़ बढ़ गई है, दिन में पाबंदियों के चलते यह लोग सीधे घर पर ही पहुंच रहे हैं। एक अन्य गुलाम मोहम्मद हज्जाम पिछले तीन दशकों में अपने नियमित ग्राहकों के घरों पर जाकर दाढ़ी व बाल बनाते हैं। वह कहते हैं कि उनके ज्यादातर ग्राहक उनकी तरह बुजुर्ग हैं। कश्मीरी युवा स्थानीय कारीगरों की बजाए बिजनौर के कारीगरों का काम पसंद करते हैं। लेकिन अब जिस प्रकार का संकट आया है। वह स्थानीय युवाओं के लिए काम को हाथ में लेने के अवसर में तब्दील हो सकता है। इसलिए स्थिति सामान्य होने पर वह बाजार में एक दुकान लेने की योजना बना रहे हैं।

 

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- फोटो : सोशल मीडिया
लोगों ने खुद ही शुरू कर दी कटिंग
32 वर्षीय इंजीनियरिंग सलाहकार मोहम्मद शोएब बताते हैं कि बहुत से कश्मीरी लंबे समय तक बंद और प्रतिबंधों के मद्देनजर असहज लुक से बचने के लिए क्लिप्स, और ट्रिमर का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि दाढ़ी और शेविंग के लिए सैलून जाने की जरूरत ही नहीं, घर पर ही यह करना आसान है। हां कटिंग में दिक्कत हो सकती है। मैं अपने बाल नहीं काट सकता, लेकिन मैं अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए यह काम कर सकता हूं और उनमें से ही कोई मेरे लिए भी यह काम कर सकता है। मैंने तो अपने दो साल के बेटे की कटिंग कर यह काम शुरू भी कर दिया है। और मुझे नहीं लगता कि मैं बहुत बुरा हेयर ड्रेसर हूं ।

 

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जम्मू तवी रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
तीन लाख श्रमिकों ने घाटी छोड़ी
नई परिस्थितियों में घाटी से लगभग 300000 से अधिक कुशल और अकुशल श्रमिकों ने पलायन किया है। ऐसे में बाल कटिंग और शेविंग जैसे बहुत से काम कश्मीरी लोगों के लिए ‘यह काम स्वयं करो’ जैसे मौके भी उपलब्ध करा रहे हैं।
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