भट्ठी की तरह होता है क्लासरूम जहां तपकर नया आकार लेता है भविष्य
उन्होंने कहा कि टीचर्स और उनकी टीचिंग समाज और राष्ट्र की रीढ़ हैं, राष्ट्र की आत्मा हैं और भविष्य की नींव हैं। क्लासरूम केवल चार दीवारें, कुर्सी और ब्लैकबोर्ड नहीं है। मैं क्लासरूम को एक लोहार की भट्ठी के रूप में देखता हूं, जहां भविष्य तपकर नया आकार लेता है। शिक्षक केवल सिलेबस पूरा करने वाला नहीं, बल्कि एक सच्चा शिल्पकार होता है।
एआई के दौर में क्यों बढ़ी शिक्षक की जिम्मेदारी
एलजी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक के बढ़ते उपयोग के बावजूद शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई है बल्कि पहले से अधिक अहम हो गई है। उन्होंने कहा कि तकनीक से जानकारी मिल सकती है लेकिन बच्चों को सही सोच देना, उन्हें दिशा दिखाना और जीवन से जुड़े फैसले लेना सिखाना केवल शिक्षक ही कर सकते हैं। बदलते समय में शिक्षक का काम सिर्फ पढ़ाना नहीं रह गया है। बच्चों को समझना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना आज शिक्षा की सबसे बड़ी जरूरत है।
जानकारी के उपभोक्ता नहीं विश्लेषक बनाना जरूरी
उपराज्यपाल ने कहा कि आज जानकारी हर जगह उपलब्ध है लेकिन जरूरत इस बात की है कि बच्चे उस जानकारी को समझें, परखें और सही निर्णय लेना सीखें। उन्होंने कहा कि ज्ञान आधारित समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव तभी रखी जा सकती है जब विद्यार्थी केवल जानकारी लेने वाले नहीं, बल्कि उसका विश्लेषण करने वाले बनें। एलजी ने कहा कि शिक्षक अगर बच्चों को खोज करने, प्रयोग करने और समाधान ढूंढने का अवसर देते हैं, तो वही बच्चे आगे चलकर आत्मनिर्भर सोच विकसित करते हैं।
उपराज्यपाल ने दिए शिक्षकों को 5 मंत्र
ग्रहण करने की क्षमता और तर्कशीलता बढ़ाएं
एलजी ने कहा कि ग्रहण करने की क्षमता, लगातार सीखने की आदत और लचीलापन ऐसी योग्यताएं हैं, जो हमेशा प्रासंगिक रहेंगी। ये गुण विद्यार्थियों को समय के साथ खुद को बदलने योग्य बनाते हैं। कक्षा में शिक्षक केवल किताबों से जवाब न दें बल्कि प्रश्न पूछें और विद्यार्थियों के उत्तरों को तर्क की कसौटी पर परखें। छात्रों को केवल जानकारी लेने वाला नहीं बल्कि उसका विश्लेषण करने वाला बनाना जरूरी है।
सहयोग की संस्कृति और सामूहिक काम
एलजी ने कहा कि बदलती दुनिया अकेले काम करने वालों की नहीं, बल्कि सहयोग से काम करने वालों की होगी। कक्षा में सहयोग की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए। क्लासरूम को ऐसा स्थान बनाया जाए जहां शोध, लेखन और नवाचार सामूहिक प्रयासों के रूप में आगे बढ़ें। इससे विद्यार्थियों में जिम्मेदारी और टीम भावना विकसित होती है।
पाठ्यक्रम से आगे सोचें कहानियों से समझाएं
एलजी ने कहा कि किसी भी कक्षा में पाठ्यक्रम केवल दिशा देता है, लेकिन रचनात्मकता और जिज्ञासा ही विद्यार्थियों को जीवन के लिए तैयार करती हैं। शिक्षक को पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक प्रेरित शिक्षक गणित पढ़ाते समय उदाहरणों और कहानियों के माध्यम से वित्तीय समझ भी जोड़ सकता है।
पढ़ाई को विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ें
एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि पढ़ाई को जीवन से जोड़ना जरूरी है, ताकि विद्यार्थी हर दिन कुछ नया सीखें और उनके मन में नए सवाल पैदा हों। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में शिक्षकों का काम केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों की रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना होना चाहिए।
पेश करें आजीवन सीखने छात्र बने रहने का उदाहरण
एलजी ने कहा कि शिक्षकों को स्वयं आजीवन सीखने और छात्र बने रहने का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। जब कोई शिक्षक यह स्वीकार करता है कि उसे किसी सवाल का जवाब नहीं पता और वह छात्र के साथ मिलकर समाधान खोजने को तैयार होता है, तभी सीखने की सही प्रक्रिया शुरू होती है। शिक्षकों को बनी-बनाई सीमाएं तोड़कर विद्यार्थियों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि असीम संभावनाएं देनी चाहिए।