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जम्मू-कश्मीर: लैवेंडर की खेती से महकेंगे खेत, मुनाफे से चहकेंगे किसान

Thu, 22 Apr 2021 05:00 PM IST
करिश्मा चिब एस खजूरिया, कठुआ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
केंद्र सरकार की सुगंध मिशन योजना के तहत बनी भी अब बैंगनी क्रांति का हिस्सा बनने जा रहा है। जिले के ठंडे इलाकों की बंजर जमीन भी आने वाले वर्षों में अब किसानों की आय का बड़ा स्रोत बनेंगी। कृषि विभाग कठुआ, भद्रवाह में लैवेंडर की खेती के बेहतरीन नतीजे सामने आने के बाद बनी में अब प्रायोगिक तौर पर इसकी खेती करवाने जा रहा है। इसके लिए कृषि निदेशक कश्मीर की ओर से उपलब्ध करवाई गई लैवेंडर की दस हजार कटिंग बनी पहुंच गई हैं। प्रायोगिक तौर पर इसे बनी सब डिवीजन के बीस किसानों को उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिसे लोआंग, चांदल, डुग्गन और संदरूण में लगाया जाएगा। प्रयोग सफल रहा तो विभाग की योजना अगले वर्ष इस योजना में सौ से अधिक किसानों को शामिल कर बनी को लैवेंडर क्लस्टर के रूप में विकसित करने की है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह में किसानों ने मक्के की पारंपरिक खेती छोड़ पहाड़ियों के ढलान पर खुशबूदार लैवेंडर के फूल की खेती शुरू की, जो उनके लिए अपेक्षाकृत अधिक फायदेमंद साबित हुई है। गैर पारंपरिक सुगंधित पौधों की खेती शुरू कर भद्रवाह के दो सौ से अधिक किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार तो कर रही रहे हैं अपनी आजीविका के साधनों को भी बेहतर कर रहे हैं।
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लैवेंडर की खेती
साल में दो बार खिलते हैं फूल
विशेषज्ञों के अनुसार लैवेंडर के फूल साल में दो बार खिलते हैं। इसके पौधे को एक बार रोपने पर इसकी उम्र कम से कम पंद्रह साल तक रहती है। खास बात यह है कि इसे बंजर, ढलान और पथरीली जमीन पर भी उगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल में रोपने के बाद जून में और फिर अक्तूबर, नवंबर में फूल खिलते हैं। अधिकतर फूल जून महीने में ही खिलते हैं।
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लैवेंडर का तेल - फोटो : Pixabay
महंगा बिकता है लैवेंडर का तेल
मुख्य कृषि अधिकारी कठुआ विजय उपाध्याय ने बताया कि लैवेंडर की खेती ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े आराम से की जा सकती है और इसको एक बार लगाने के बाद यह करीब 15 से 20 साल तक पेड़ जीवित रहता है। इससे किसान आसानी से इस खेती को कर सकता है। उन्होंने कहा कि लैवेंडर से निकलने वाले तेल की बाजार में कीमत दस हजार रुपये प्रति लीटर तक है और लगाने के तीसरे साल में प्रति कनाल ढाई से तीन लीटर तक तेल आसानी से हासिल होने लगता है। बताया कि एक कनाल में आठ सौ से एक हजार कटिंग रोपी जा सकती हैं। अगर पहाड़ी क्षेत्रों खासकर बनी और आसपास में किसान इसकी खेती करते हैं, तो काफी फायदा मिल सकता है जिसके लिए यहां का मौसम भी अनुकूल है। बताया कि इस पौधे से ही कटिंग तैयार की जा सकती है। ऐसे में अन्य किसानों के लिए कटिंग भी बनी से ही आने वाले वर्षों में उपलब्ध करवाई जा सकेंगी।
 

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lavender oil
अरोमा मिशन फेज-2 में जम्मू संभाग के अन्य किसान भी ले सकते हैं लाभ
सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू अगले तीन वर्षों में प्रदेश में नौ हजार हेक्टेयर भूमि पर लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देगा। इसके लिए आईआईआईएम ने अरोमा मिशन फेज-2 की शुरुआत की है। इसमें बूंदा फार्म में दो लाख कटिंग लगाई गई हैं। जो कश्मीर में पंजीकृत किसानों को उपलब्ध करवाई गई हैं। आईआईएम की ओर से अरोमा मिशन के कोआर्डिनेटर डॉ. सुमित गहरोला से संपर्क किया जा सकता है, जो जम्मू संभाग के किसानों को भी यह कटिंग उपलब्ध करवाएंगे।
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बताया कि आईआईएम की ओर से एक्सट्रैक्टर, डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित किए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल डिस्टिलेशन यूनिट भी पैदावार वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा। बताया कि अरोमा मिशन के पहले फेज में दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया था। उन्होंने कहा कि 14 ऐसे पौधे हैं जिनकी खेती तीन सौ मीटर से साढ़े चार हजार मीटर तक किसी भी ऊंचाई या पर्यावरण वाले क्षेत्र में हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर काफी लोकप्रिय बन गया है, जिसकी खेती से काफी किसानों के आमदनी बढ़ी है। -डॉ जबीर अहमद, अध्यक्ष, आईआईएम श्रीनगर ब्रांच

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