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जेके में महाशिवरात्रि: शंकराचार्य मंदिर में कश्मीरी पंडितों ने मनाया 'हेरथ',सुरक्षाबलों के कैंपों में हवन-पूजन

Sat, 18 Feb 2023 12:59 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
घाटी में महाशिवरात्रि पर सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में भीड़ लगी रही। कश्मीर पंडित समुदाय के अलावा अन्य लोग उत्साह के साथ भोले के दरबार में माथा टेकने के लिए पहुंचे। इससे दिनभर रौनक बनी रही। श्रीनगर के एतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को खास तौर से सजाया गया था। मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी किया गया था। डल झील के किनारे सुलेमान टेंग स्थित शंकराचार्य मंदिर में सुबह से ही भक्त जुटने लगे थे। यहां सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिली।
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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर

बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों द्वारा शिवलिंग पर दूध, फूल, आदि चढ़ाकर प्रार्थना की गई। इस मौके पर कश्मीरी समुदाय के लोगों ने भी कश्मीरी पंडितों को शुभकामनाएं देने के साथ मिठाइयां भेंट कीं। कश्मीर घाटी में धार्मिक सद्भाव के साथ महाशिवरात्रि का पर्व मनाया गया। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के साथ-साथ बाहर से आए लोगों ने भी पूजा पाठ में भाग लिया।

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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को बेहतरीन तरीके से सजाया गया था। मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना का दौर शाम तक चलता रहा। शंकराचार्य मंदिर में सुबह से ही भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शनों के लिए आने शुरू हो गए। भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, फूल आदि चढ़ाकर प्रार्थना की।

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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर

शंकराचार्य मंदिर में हुए पूजा पाठ में कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों से आए पर्यटकों और सुरक्षा कर्मियों ने विशेष हवन में भाग लिया। कश्मीरी समुदाय के लोगों ने भी मिठाइयां बांटी। मंदिर के पुजारी ने बताया कि महाशिवरात्रि के मौके पर सुबह पांच बजे से पहले ही पूजा अर्चना शुरू हो गई। सबसे पहले रुद्राभिषेक हुआ।

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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
उसके बाद से हवन का सिलसिला शुरू किया गया। मंदिरों के अलावा सीआरपीएफ, बीएसएफ सेना आदि के कैंपों में भी अच्छी खासी रौनक देखने को मिली। जवानों ने अपनी-अपनी यूनिटों में विशेष पूजा अर्चना की। लंगर भी लगाया गया।

 
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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों की जम्मू-कश्मीर में धूम है। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों को भी सजाया गया है। महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां की गई हैं। कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार होता है। देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा इसे यहां ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। कश्मीरी पंडित इसे 'हेरथ' के रूप में मनाते हैं। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है।
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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
हेरथ को कश्मीरी संस्कृति के आंतरिक और सकारात्मक मूल्यों को संरक्षित रखने का पर्व भी माना जाता है। इसके साथ ही यह लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बता दें कि कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर भगवान शिव सहित उनके परिवार की स्थापना घरों में करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वटुकनाथ घरों में मेहमान बनकर रहते हैं। करीब एक महीने पहले से इसे मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।

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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
इस त्योहार के दिन पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों को प्रतीकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। उपलब्धता के अनुरूप कई घरों में पुराने समय के पीतल के बर्तनों को प्रयोग में लाते हैं। इस पूजन व घरों में बनने वाले व्यंजनों में कमल ककड़ी और गांठगोभी काफी प्रमुख होती है। जम्मू-कश्मीर में इसे मोंजी और नदरू के नाम से जाना जाता है।
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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग - फोटो : बासित जरगर
तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर सभी परंपराएं निभा रहे हैं। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि अब भी यह परंपरा जारी है, यही कश्मीरियत और इंसानियत की खूबसूरती है। शिवरात्रि पर वे भगवान भैरव की भी पूजा करते हैं। भगवान भैरव को मांस और मछली का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे वह निभा रहे हैं। रीति के अनुसार शाकाहारी भोग भी लगाए जाते हैं। इसमें पांच-छह प्रकार की सब्जियां होती हैं। रात में पूजा अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
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