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Ajay Pandita की बेटी ने आतंकियों को ललकारा, कहा- पापा का शेर अभी जिंदा है, हिम्मत है तो सामने आओ

Thu, 11 Jun 2020 12:04 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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अजय पंडिता (फाइल फोटो), बिलखती बेटियां व परिजन - फोटो : सोशल मीडिया
सरपंच अजय पंडिता की हत्या के बाद से उनके परिवार में मातम का माहौल है। घर के सभी सदस्य पूरी तरह से टूट चुके हैं। वहीं अजय भारती की बेटी शीन ने कहा कि आतंकियों तुमने मेरे पिता को मारा है पर शायद तुम्हें पता नहीं कि उनका शेर अभी जिंदा है। शीन ने कहा कि मैं अजय भारती की बेटी हूं, कभी हारूंगी नहीं। पिता की हत्या से दुखी अजय पंडिता की बेटी ने कहा कि मैं अपनी पिता की मौत का बदला जरूर लूंगी। इसके बाद शीन ने बिलखते हुए कहा कि मेरे पिता मुझे शेर बुलाते थे। आतंकियों को मैं बता दूं कि मैं शेर ही हूं। उन्होंने आतंकियों को ललकारते हुए कहा कि हिम्मत है तो सामने आओ...तुमको छोड़ूंगी नहीं।
 
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बिलखती बेटियां व परिजन - फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने कहा कि पापा की मृत्यु के बाद से मेरा परिवार टूट चुका है। लेकिन मुझे अपने पिता पर गर्व है। मेरे पिता दिल के बहुत साफ इंसान थे। किसी भी धर्म का व्यक्ति हो, वो सबके साथ खड़े रहते थे। वो अक्सर मुझसे कहते थे कि मैं उनका ही रूप ही हूं। उन्होंने कहा कि मैं अपने कर्तव्य से अपनी पिता की आत्मा को श्रद्धांजलि दूंगी।
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अजय पंडिता की हत्या - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में कश्मीरी पंडितों के लौटने और उनके पुनर्वास के प्रयास रोकने के लिए आतंकी तंजीमों ने षडयंत्र रचा है। शासन-प्रशासन की कोशिशों को झटका देने और लोगों में खौफ पैदा करने की साजिश के तहत ही कश्मीरी पंडित सरपंच अजय पंडिता की आतंकियों ने सोमवार को हत्या कर दी।
 

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अजय पंडिता की हत्या के बाद घाटी में चस्पा किए गए धमकी भरे पोस्टर - फोटो : अमर उजाला
कुलगाम जिले के नादिमर्ग में 2003 के नरसंहार के 17 साल बाद घाटी में कश्मीरी पंडित की हत्या को अंजाम देकर आतंकियों ने इस षडयंत्र को पुख्ता कर दिया है। दरअसल, उत्तरी कश्मीर में सेना की ओर से जमीन खरीदने की पेशकश के बाद आतंकी तंजीमें बुरी तरह बौखला गई हैं। इसी सिलसिले में आतंकियों ने धमकी भरे पोस्टर चस्पा कर किसी भी बाहरी व्यक्ति को घाटी में नहीं बसने देने और जमीन न बेचने की चेतावनी दी है।
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मृतक के परिजन व अन्य लोग - फोटो : अमर उजाला
उधर, अजय पंडिता की हत्या से कश्मीर घाटी में रह रहे 600 से ज्यादा परिवारों में भी खौफ है। इनमें से ज्यादातर वे परिवार हैं जो पहले से वहीं रह रहे हैं। वहीं घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित समुदाय के करीब तीन हजार युवा भी हैं।
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