अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी
- फोटो : बासित जरगर
गुलाम नबी डार ने कहा कि मेरे पिता ने सपना देखा था कि मैं एक अच्छा कारीगर बनूं और इसे अमल में लाऊं। वह चाहते थे कि मैं वास्तविक शिल्प कौशल सीखूं, जो कश्मीर लंबे समय से प्रसिद्ध है। पिता की बातों ने मेरा मनोबल बढ़ाया। जब मैं 14 साल का था, अपने करियर की शुरुआत में दो मास्टर कारीगरों के साथ बैठता था। मैं पूरी तरह से कच्चा था और विपरीत परिस्थितियों के कारण उचित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाया था। वो दोनों कारीगर जो कुछ भी जानते थे, मुझे सिखाया।