सैन्य वाहनों के काफिले को उड़ाने की आतंकियों की साजिश गुरुवार को एक बार फिर सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दी, जिसके बाद शुक्रवार को आईईडी निष्क्रिय किया गया। दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर प्लांट शक्तिशाली आईईडी बरामद कर दहशतगर्दों के नापाक मंसूबे को विफल कर दिया गया। 20-25 किलो की आईईडी एक डिब्बे में प्लांट की गई थी। घटना के बाद से पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है। सैन्य प्रतिष्ठानों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हाईवे पर भी जगह-जगह नाके लगाकर चेकिंग की जा रही है।
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बम निरोधक दस्ता
- फोटो : अमर उजाला
अनंतनाग जिले में श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर वनपोह इलाके में सेना के एक गश्ती दल ने गरुवार सुबह करीब 8 बजे संदिग्ध वस्तु सड़क किनारे पड़ी देखी। जांच करने पर बता चला कि यह आईईडी है। सूचना के तत्काल बाद हाईवे पर यातायात रोक दिया गया।
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हाईवे किया गया बंद
- फोटो : अमर उजाला
तत्काल बम निरोध दस्ते को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद दस्ते ने इसे निष्क्रिय किया। यह आईईडी करीब 20-25 किलो की थी और एक डिब्बे में प्लांट की गई थी। यदि इसमें विस्फोट होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। आशंका जताई जा रही है कि आतंकियों ने सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने के लिए इस आईईडी को प्लांट किया था।
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बरामद आईईडी
- फोटो : अमर उजाला
हाईवे पर एक सप्ताह में तीसरी बार आईईडी बरामद
आतंकियों की ओर से सैन्य वाहनों को उड़ाने की साजिश के तहत हाईवे पर एक सप्ताह में तीसरी बार आईईडी प्लांट की गई। 21 नवंबर को अनंतनाग में आईईडी बरामद होने से पहले 15 नवंबर को भी श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पांपोर में ईडीआई के बाहर भी आतंकियों द्वारा एक प्रेशर कुकर में पांच किलो की आईईडी प्लांट की गई थी जिसे समय रहते नकारा बना दिया गया था। 19 नवंबर को आर्मी की रोड ओपनिंग पार्टी ने राजोरी के कल्लर इलाके में जम्मू-पुंछ हाईवे पर आईईडी बरामद की थी।
मई महीने में भी इसी जगह आतंकियों ने आईईडी प्लांट किया था। इसे सेना ने बरामद करने के बाद नष्ट कर दिया था। 17 नवंबर को एलओसी पर पलांवाला सेक्टर में जीरो लाइन पर फेंसिंग के बिल्कुल पास पाकिस्तान की ओर से आईईडी प्लांट की गई थी। इसकी जद में आए सेना के वाहन में सवार एक जवान शहीद हो गया। दो अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। विस्फोट में सेना का वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
पुलवामा दोहराया जा सकता था
सूत्रों का कहना है कि आईईडी इतनी शक्तिशाली थी कि यदि विस्फोट हो जाता तो पुलवामा दोहराया जा सकता था। काफी जान माल का नुकसान होता। पुलवामा में फरवरी महीने में सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।