जम्मू पुलिस की गोली ने रविवार को तरसेम लाल नामक २६ साल के युवक की जान ले ली। पुलिस की मानें तो तरसेम को स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने चरस तस्करी के आरोप में दो अन्य युवकों के साथ पकड़ा था(हालांकि उसके खिलाफ खबर लिखे जाने तक कोई मामला दर्ज नहीं था)। पुलिस का कहना है कि एसओजी की टीम तरसेम लाल (चिन्नोर), इरफान (सूरनकोट) और कमल शर्मा (किश्तवाड़) को पुलिस वाहन में गांधी नगर से अखनूर लेकर जा रही थी। दोमाना थाने के पास तीनों को वाहन से उतारा गया (पुलिस यह नहीं बता रही है कि क्यों उतारा गया)। इसी दौरान तरसेम ने भागने की कोशिश की तो एसओजी टीम के सदस्य ने उसे गोली मार दी। गोली कूल्हे के नीचे लगी और जीएमसी अस्पताल पहुंचने से पहले ही तरसेम ने दम तोड़ दिया।
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बिना FIR किया गिरफ्तार फिर मारी गोली, तस्वीरों में मामला
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पुलिस की गोली से मारा गया युवक परिवार में अकेला
कमाने वाला था। पेशे से ड्राइवर तरसेम शुक्रवार को घर से यह कहकर गया था कि
वह दोस्तों के साथ पत्नीटाप जा रहा है। घर से अपनी कार लेकर वह अपने दो
दोस्तों इरफान और कमल के साथ निकल गया। तरसेम के पिता शमशेर ने बताया कि
शनिवार शाम सात बजे तरसेम से बात हुई थी। उसने बताया था कि वह घर आ रहा है।
इसके बाद फोन बंद हो गया। रात भर घर नहीं आने पर वह चिंतित हुए। रविवार को
घर पर उसकी मौत की सूचना पहुंची तो परिवार में मातम छा गया। मां अस्पताल
में रो-रो कर बेहाल थी तो पिता अपने बुढ़ापे के सहारे के खो जाने के सदमे
में था।
मृतक का पिता बार बार एक ही बात कह रहा था कि एक गोली उसे भी मार दो। उसकी दुनिया उजड़ गई है। पिता का कहना था कि बेशक उनका बेटा किसी गलत कार्य में पकड़ा गया, लेकिन वह इतना बड़ा अपराधी नहीं था कि उसको गोली मार दी जाए। शमशेर के साथ आए अन्य रिश्तेदारों ने भी पुलिस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि गोली मारने की क्या आवश्यकता थी।
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पुलिस ने युवक के मरने की खबर तक घर पर नहीं दी। मामला बिगड़ने की आशंका में पुलिस ने सबसे पहले चिन्नौर के सरपंच और स्थानीय नेताओं और क्षेत्र के गणमान्य लोगों को विश्वास में लिया, ताकि मृतक के परिवार को शांत रखा जा सके। इसके बाद सरपंच, पार्षद और कुछ लोग मृतक के घर गए और उन्हें सूचित किया। इसके बाद पुलिस की गाड़ी में बिठाकर उन्हें जीएमसी लाया गया। हालांकि, मृतक के घर के आसपास के कुछ लोगों को बताया जा चुका था, लेकिन कोई बताने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
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स्थिति बिगड़ने की आशंका से पुलिस के तमाम आला अधिकारी मेडिकल कालेज अस्पताल के शवगृह के बाहर पहुंच गए। इससे पहले अधिकारी मृतक के घर के पास स्थिति को भांपने के लिए पहुंचे और माहौल शांत देखकर लौट आए। मृतक के घर जाकर बताना जरूरी नहीं समझा गया। शवगृह के बाहर डीआईजी, इंचार्ज एसएसपी, एसपी, डीएसपी, एसएचओ, सब इंस्पेक्टर जमे रहे और परिवार को यकीन दिलाया कि आरोपी पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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चिन्नौर में वर्ष 2008 में आतंकियों के हमले में पहले ही शमशेर सिंह का परिवार जख्म खा चुका है। हमले में शमशेर के परिवार में भाई और बच्चों की मौत हो गई थी। कई लोग जख्मी हो गए। इसके जख्म अब तक हरे हैं, क्योंकि सरकार की तरफ से प्रभावितों को अब तक कोई सहायता नहीं दी गई। रविवार को भी जब शमशेर के बेटों को एसपीओ लगाने की बात कही गई तो उसने कहा कि अभी उनके पहले जख्म हरे हैं और अब सरकार के नए आश्वासन मिल रहे हैं।
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राज्य पुलिस दो सप्ताह में दूसरी बार सवालों के घेरे में आ गई है। जम्मू के सतवारी में भिंडरावाला पोस्टर विवाद में सिख युवक की मौत से उपजे विवाद की आंच अभी पूरी तरह ठंडी नहीं पड़ी थी कि अब चरस तस्करी में पकड़े गए युवक की मौत ने पुलिस को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। बड़ी बात यह है कि ऐसे मामलों में स्थानीय पुलिस को कानूनी कार्रवाई करनी होती है, लेकिन यहां तो पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) की सीधी कार्रवाई हुई है।
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गौरतलब है कि चार जून को भिंडरावाला विवाद की गाज शहर के एसएसपी और एसएचओ पर गिरी थी। गृह विभाग को इसकी जांच के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में टीम बनानी पड़ी। पुलिस ने भी स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (सिट) का गठन किया। इस मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई कि एक नया मामले पुलिस के सामने है। इस मामले को लेकर भी सोमवार को स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम का गठन किया जाएगा। वहीं, लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं। पिछले एक महीने की उच्च स्तरीय बैठकों में यह जोर दिया जा रहा है कि लोगों के साथ व्यवहार में पुलिस सुधार लाए।