नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्थित पुंछ जिले के सलोत्री सेक्टर के गांव फिल्लोर के हर घर की पीठ पाकिस्तान की तरफ है। इसका मुख्य कारण है सुरक्षा ताकि पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली गोलीबारी में उन्हें और उनके बच्चों को कोई नुकसान न हो।
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नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना की चौकियों के एक दम सामने स्थित गांव फिल्लोर में हर मकान का निर्माण कराते समय मकान की पीठ पाकिस्तानी चौकियों की तरफ रखी जाती है।
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इतना ही नहीं मकान के पीछे की दीवार में किसी प्रकार की कोई खिड़की अथवा रोशनदान भी नहीं रखा जाता। पीछे की दीवार आरसीसी से काफी मजबूत बनाई जाती है ताकि पाकिस्तानी सेना की तरफ से दागी जाने वाली गोलियां मजबूत दीवार को पार न कर सकें और घर के अंदर मौजूद लोग सुरक्षित रहें। गांव से पुलस्त नदी के उस पार मात्र 100-200 मीटर की हवाई दूरी पर पाकिस्तानी सेना की चौकियां स्थित हैं।
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कारगिल की लड़ाई से पहले ऐसे नहीं थे घर
गांव फिल्लोर के ग्रामीण लोकेश बख्शी, बलराज शर्मा, फजल इलाही और राकेश कुुमार का कहना है कि 1965, 1971 और कारगिल की लड़ाई के पहले गांव में मकान बनाते समय कोई इस बात पर ध्यान नहीं देता था कि मकान का मुंह किस तरफ और पीठ किस तरफ रखी जाए। लेकिन पाकिस्तानी सेना की तरफ से लगातार दागी जाने वाली गोलियां घरों के अंदर तक आने लगीं। इसके बाद लोगों ने अपने मकानों का रुख ही बदलना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे गांव के सभी मकानों का मुंह बदल कर पीठ पाकिस्तान की तरफ कर दी गई। आज भी जब गांव में कोई नया मकान बनाता है तो वह मकान का मुंह पाकिस्तान के उल्टी तरफ रखता है ताकि गोलियों से बचा जा सके।
...तो बाहर नहीं निकल पाएंगे
फजल इलाही जोकि अपने जीवन की पूरी कमाई लगा कर नया मकान बना रहे हैं उनका कहना है कि वैसे तो मुसलिम समुदाय के लोग अपने मकान पश्चिम दिशा की तरफ मुंह रख कर बनाते हैं लेकिन गोलीबारी से बचने के लिए हम अपना घर ऐसा बनाते हैं क्योंकि अगर घर का मुंह पाकिस्तान की तरफ रखते हैं तो हम घर से बाहर ही नहीं निकल पाएंगे। अब देखिए, मेरी पूरी जमीन मेरे मकान के पीछे की तरफ रह गई है पर बाल बच्चों की जान की खातिर मुझे मकान को उल्टी तरफ बनाना पड़ रहा है।