जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में मारे गए आतंकी कइयों की जान ले सकते थे। यदि हाइवे से नीचे उतर कर आतंकी खड्डों की तरफ नहीं भागते, तो आतंकी कोहराम मचा सकते थे। क्योंकि जिस जगह आतंकी हमला हुआ। उसके ठीक सामने बन टोल प्लाजा है।
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नगरोटा आतंकी हमला
- फोटो : अमर उजाला
हमले के वक्त टोल प्लाजा पर लगभग 50 वाहन मौजूद थे। यदि आतंकी खड्डों की जगह इन वाहनों की तरफ बढ़ जाते, तो हाइजैक कर किसी बड़ी साजिश को अंजाम दे सकते थे। हाइवे पर 17 महीनों में यह दूसरा मौका है। जब इस तरह का हमला हुआ है। इससे पहले 12 सितंबर 2018 को झज्जर कोटली में हमला हुआ था।
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नगरोटा आतंकी हमला
- फोटो : संजय गुप्ता
टोल प्लाजा के कुछ मुलाजिमों ने बताया कि वह सुबह अपने केबिन में मौजूद थे। वाहनों का आना जाना लगा था। तभी एकदम से गोलियों की तड़तड़हाट सुनाई देने लगी। वह लोग अपने केबिन छोड़कर भाग गए। पास में बनी बैरकों में जाकर छुप गए।
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नगरोटा आतंकी हमला
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों का कहना है कि बार्डर पर मौजूद आतंकियों को पाकिस्तान की सेना गोला बारूद दे रही हैं। जैसे ही आतंकी घुसपैठ करते हैं, तो उनको हथियार भी दिए जाते हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने भी माना है कि आतंकियों के पास कश्मीर में हथियारों की कमी है। इसलिए पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई हो रही है।
सीआरपीएफ पोस्ट पर दागी गोलियां
एक आतंकी ट्रक में हाइडआउट से निकल कर कीटनाशक के बैग के ऊपर चढ़ गया। जिसने ट्रक के ऊपर से फायरिंग करना शुरू कर दी। जैसे ही यह आतंकियों ने फायरिंग की तो बिजली भी चली गई। तभी आतंकी ने आगे पीछे गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। सामने सीआरपीएफ की पोस्ट पर भी गोलियां चलाईं। जबकि सीआरपीएफ के वाहन के शीशे भी गोलियों से टूट गए।