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Jammu Craft Mela: देश का रंग... सज गया है जम्मू का कला केंद्र, देखें हुनर और संस्कृति का संगम

Tue, 27 Sep 2022 06:42 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

नाबार्ड की तरफ से अखिल भारतीय शिल्प-कला मेला आयोजित किया जा रहा है। कला, हुनर और संस्कृति को देखने का संगम यहां मिल रहा है। इसे 'ग्राम्य 2022' नाम दिया गया है। इसमें करीब 18 राज्यों से 55 स्टॉल पहुंचे हैं। दो अक्तूबर तक मेला जारी रहेगा।
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Jammu Craft Mela - फोटो : अमर उजाला
अगर आप कला क्षेत्र में रुची रखते हैं, इंसानी हुनर को समझना चाहते हैं या देशभर के दस्तकारों से रूबरू होना चाहते हैं, तो इस समय जम्मू कला केंद्र में जाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। यहां नाबार्ड की तरफ से अखिल भारतीय शिल्प-कला मेला आयोजित किया जा रहा है। कला, हुनर और संस्कृति को देखने का संगम यहां मिल रहा है। इसे 'ग्राम्य 2022' नाम दिया गया है। इसमें करीब 18 राज्यों से 55 स्टॉल पहुंचे हैं। दो अक्तूबर तक मेला जारी रहेगा।
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Gramya 2022 - फोटो : अमर उजाला
देश भर से दस्तकारों, शिल्पकारों, कारीगरों के स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी जम्मू कला केंद्र में लगाई गई है। अलग-अलग राज्यों की खासियत से जुड़े सामानों को लाया गया है। उत्तर प्रदेश की चिकनकारी, बिहार की विश्व प्रसिद्ध मिथिला और मधुबनी पेंटिंग, झारखंड की टसर सिल्क साड़ियां, राजस्थान की जयपुरी रजाई और चर्मा जूती, पश्चिम बंगाल के जूट उत्पाद, तमिलनाडु से पालमायरा और केला फाइबर। जम्मू कश्मीर के स्थानीय उत्पाद बसोहली पश्मीना, कश्मीरी कालीन और जैविक हल्दी, शहद भी प्रदर्शित किए गए हैं।
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जम्मू में कला शिल्प मेला - फोटो : अमर उजाला
यहां पर रंग बिरंगी लाईटें, ज्वेलरी, कपड़े, सजावट का सामान, खाने के पकवान सभी के स्टॉल से मौजूद हैं। नाबार्ड जम्मू-कश्मीर की उप महाप्रबंधक अनामिका ने बताया कि नाबार्ड की तरफ से मेले का आयोजन किया गया है। इसमें कोई भी मशीन से बने उत्पाद को नहीं दिखाया जा रहा है। आमजन ने कला और अपने हुनर से इन चीजों को तराशा है। जम्मू के निवासी बढ़चढ़ कर इस मेले में आएं और खरीदारी करें, ताकि कारीगरों को प्रोत्साहना मिले।

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Jammu - फोटो : अमर उजाला
मधुबनी बिहार से युवा आकृति संगम की ओर से मधुबनी पेंटिंग का स्टॉल लगाया गया है। इस स्टॉल पर दुपट्टा, शॉल, पेपर पेंटिंग, हैंड बैग, पर्स, साड़ियां उपलब्ध है। इनकी खासियत इन पर बनी विश्वप्रसिद्ध मधुबनी चित्रकारी है। पेपर के ऊपर नेचुरल कलर का प्रयोग होता है, जबकि कपड़ों पर पोस्टर कलर का प्रयोग होता है।
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Jammu - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश के जिला किनौर से आए रामकिशन कीनौर की पारंपरिक वस्त्रों को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इनके स्टॉल पर उपलब्ध कोट, टोपी आदि कपड़े भेंड़ के ऊनों से बने हैं। ये उत्पाद हाथ से बने हैं। इन कपड़ों की खासियत है कि ये सर्दियों के लिए अच्छे होते हैं और बीपी को मेंटेन रखते हैं।
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