जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार गठन के बाद नए गेम प्लान पर काम कर रहे पाकिस्तान की करतूतों से धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा है। घाटी में कमजोर पड़ रहे अलगाववादियों को हत्या का डर दिखा कर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई विभिन्न गुटों पर अपने एजेंडे के मुताबिक विलय का दबाव डाल रही है। (खबर - गुंजन कुमार)
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मीरवाइज को गिलानी गुट से विलय पर मजबूर कर रही ISI
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भारतीय खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक आईएसआई आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस (एपीएचसी) के मीरवाइज उमर फारूक को कट्टरवादी सैयद अली शाह गिलानी गुट के साथ काम करने पर मजबूर कर रही है।
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मीरवाइज को गिलानी गुट से विलय पर मजबूर कर रही ISI
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कश्मीर मामले से जुड़े सुरक्षा एजेंसी के उच्चपदस्थ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि आईएसआई मीरवाइज उमर के गुट में अब्दुल गनी बट, बिलाल लोन और मौलवी अब्बास अंसारी जैसे अलगाववादियों के प्रभाव से बुरी तरह नाराज है।
मीरवाइज को गिलानी गुट से विलय पर मजबूर कर रही ISI
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आईएसआई का मानना है कि इन नेताओं का झुकाव भारत की तरफ ज्यादा है। यही वजह है कि पाकिस्तान के कश्मीर नीतिकार उमर को गिलानी गुट के साथ काम करने की सलाह दे रहे हैं।
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मीरवाइज उमर कश्मीरी अलगाववादियों में एकमात्र ऐसा चेहरा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है। इसके विपरीत गिलानी घोषित पाक समर्थक होने व कट्टर विचारधारा के बावजूद कश्मीर की राजनीति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई जगह नहीं बना पाए हैं।
लिहाजा, आईएसआई के लिए जरूरी है कि उमर को कश्मीर एजेंडे की मुख्यधारा में रखे। खुफिया एजेंसियों को यह जानकारी भी मिली है कि पिछले कुछ दिनों में छह लोगों की हत्या का उद्देश्य बड़े अलगाववादी नेताओं को संदेश देना है।