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जम्मू-कश्मीर: सुविधाओं से वंचित बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार कर रही सेना

Sun, 09 May 2021 06:06 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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भारतीय सेना, सांकेतिक तस्वीर
सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के साथ-साथ क्षेत्र के बच्चों के भविष्य निर्माण में भी सेना अग्रणी भूमिका निभा रही है। भारतीय सेना ने स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू के सहयोग से किश्तवाड़ जिले के दूरदराज और पिछड़े क्षेत्र छात्रू में छात्र विकास कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम चार फेज में बांटा गया है, जिसमें बुनियादी ट्यूशन, मेधावी बच्चों के लिए विशेष कोचिंग, मॉडल स्कूल का विकास और कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है।

स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू ने सेना के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत पिछले वर्ष नवंबर में की थी। अब इस कार्यक्रम में बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं। कोरोना काल में स्कूल नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बंद हैं, ऐसे में सेना की पहल युवाओं के लिए शिक्षा संजीवनी की तरह काम कर रही है। कोविड एसओपी का पालन करते हुए सेना छात्रों को ऑफलाइन और ऑनलाइन शिक्षा मुहैया करवा रही है। इसमें सेना के कर्नल, मेजर और ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी बच्चों के साथ संवाद करते हैं।
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छात्र - फोटो : अमर उजाला
स्कूल शिक्षा निदेशालय के मीडिया संयोजक मीर यासीर रसूल ने कहा कि सेना के साथ मिलकर बच्चों को देश की विकाय यात्रा में योगदान देने के लिए तैयार किया जा रहा है। छात्र विकास कार्यक्रम क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में स्थानीय बच्चों के साथ लोग भी जुड़ रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों का हर स्तर पर विकास करना है, ताकि वह भविष्य में आने वाली हर चुनौती का सामना कर सकें। बच्चों को सेना से जुड़ने के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।

 
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सांकेतिक तस्वीर
छात्र विकास कार्यक्रम को चार फेज में बांटा गया है। पहले फेज में कक्षा नौ से 12वीं तक के बच्चों को इंग्लिश, फिजिक्स, कैमेस्ट्री, गणित और बायोलॉजी विषय की बुनियादी कोचिंग दी जाती है। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के साथ उन्हें पाठ्यक्रम की गतिविधियों से भी जोड़ा जाता है। स्कूल शिक्षा निदेशालय लेक्चरर मुहैया करवाता है।

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जेईई - फोटो : अमर उजाला
दूसरे फेज में पहले फेज से चुने कुछ मेधावी छात्रों को विशेष कोचिंग दी जाती है। इसमें जेईई-नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बच्चों को तैयार किया जाता है। तीसरे फेज में छात्रू के हायर सेकेंडरी स्कूलों को मॉडल स्कूल की तरह तैयार किया जा रहा है। स्कूल में जल संचयन संयंत्र, सौर ऊर्जा प्लांट, मिड-डे बनाने के लिए गोबर गैंस प्लांट बनाना शामिल है।
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मशरूम - फोटो : iStock
बच्चों को भी इसकी हर प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है। चौथे फेज में बच्चों का कौशल विकास कार्यक्रम होता है। इसमें बच्चों को मशरूम की खेती और अपशिष्ट प्रबंधन और प्रसंस्करण सिखाया जाएगा।
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