जम्मू के अरनिया सेक्टर में भारत-पाक सीमा पर स्थित इस धार्मिक स्थान को बाबा चमलियाल के नाम से जानते हैं, लेकिन बताया जाता है कि बाबा का नाम दलीप सिंह मन्हास था, जो बडे़ ही तपस्वी और चम्बल नामक चर्म रोग के माने हुए हकीम थे। बाबा चमलियाल इस कारण नाम पड़ा, क्योंकि उनका जन्म चमलियाल गांव में हुआ था। बाबा चमलियाल के स्थान पर 25 जून को मेला सजेगा।
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PICS: यहां शरबत और शक्कर से होता है त्वचा रोगों का इलाज
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मेले के दिन सुबह करीब सात बजे पाक रेंजर अधिकारी बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने की रस्म अदा करते हैं। वहीं भारत की ओर से उन्हें शरबत (चलामत) और शक्कर (प्रसाद) देकर उन्हें विदा किए जाने की परंपरा है।
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इलाज के बहाने बुलाकर मारा था
बुजुर्गों के अनुसार बाबा को धोखे से मारा गया था। वह शुरू से धार्मिक विचार के थे। चम्बल चर्म रोग का तोड़ निकालने के कारण वह जल्द ही दूर तक प्रसिद्ध हो गए। बताया जाता है कि धीरे-धीरे बाबा की मशहूरी से अन्य हकीमों का धंधा चौपट होने लगा।
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फिर एक दिन चमलियाल गांव से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित सौदोयाली गांव (अब पाक में) कुछ शरारती तत्वों ने इलाज के बहाने बुलाया। संदेश मिलते ही बाबा घोड़े पर बैठे और सौदोयाली गांव चल पड़े। जैसे ही वह उक्त गांव में पहुंचे, तो पहले से घात लगाकर बैठे शरारती तत्वों ने उनका सिर काट दिया।
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घोड़ा भी धरती में समा गया
बताया जाता है कि बाबा का घोड़ा काफी समझदार था। वह बिना सिर के ही बाबा को वहां से ले आया। उस वक्त गांव की एक औरत पास के कुएं पर थी। उसने देखा कि बाबा धरती में समा गए। मालिक को धरती में समाते देख घोड़ा भी धरती में समा गया।
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वर्तमान में उसी कुएं का पानी शरबत के तौर पर श्रद्धालु व पाक के लोगों को चलामत के तौर पर दिया जाता है। जिस स्थान पर बाबा धरती पर समाए थे, उसी स्थान की शक्कर (मिट्टी) चम्बल रोग से ग्रस्त लोग शरीर पर लेप लगाते हैं।
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पाक रेंजर भी दर पर झुकाते हैं शीश
सौदोयाली गांव, जहां बाबा दलीप सिंह को शरारती तत्वों ने मारा था, देश का बटवारा होने के बाद पाकिस्तान में चला गया, जबकि उनका पैतृक गांव चमलियाल भारत में पड़ा। बाद में बाबा के चमत्कार पर उक्त गांव के लोगों ने भी वहां पर उनकी एक मजार बना दी।
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उक्त गांव, आसपास के लोगों के अलावा पाक रेंजर भी बाबा की मजार पर श्रद्धा से शीश झुकाते हैं। जानकारी के अनुसार सात दिन तक इस गांव में मेले का आयोजन किया जाता है।
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सच्ची श्रद्धा खींच लाती है दर पर
बाबा की मजार पर शीश झुकाने पहुंचे चौआदी गांव के गुज्जर परिवार के सदस्यों का कहना था कि वह अक्सर यहां आते हैं। शायरा चौधरी ने कहा कि शुरू से ही बाबा के प्रति उनकी श्रद्धा रही है। उन्होंने कहा कि बाबा के दर्शन करने और प्रसाद ग्रहण करने के बाद सफर की थकावट एक पल में दूर हो जाती है।
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चर्म रोग में लगाते हैं शक्कर का लेप
मान्यता है कि इस स्थान पर आने से चम्बल नामक चर्म रोग की समस्या काफी हद तक दूर हो जाती है।
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बताया जाता है कि पीड़ित व्यक्ति अगर शरीर पर शक्कर का लेप करके दरगाह परिसर में धूप में बैठे, तो कुछ दिनों की प्रक्रिया से उसे काफी फायदा मिलता है।