कश्मीर की वादियों में हर मौसम का अपना अलग अहसास है। सर्दी के बाद बेसब्री से इंतजार होता है, तो वह है मौसम-ए-बहार। इसमें बर्फ की चादर उतार धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। हर तरफ रंग-बिरंगे फूल खिलखिलाते नजर आते हैं। जिधर जाओ, मन यही कहता है, थोड़ी देर और रुकते हैं। (रिपोर्ट-अमृतपाल सिंह बाली)
Trending Videos
विज्ञापन
मौसम-ए-बहार से पहले महका कश्मीर, तस्वीरें
2 of 7
इस बार यह सब समय से पहले देखने को मिल रहा है। फूलों ने पंखुडि़यां खोल ली हैं। धरती ने भी हरियाली की चादर ओढ़ ली है। घाटी में इस बार बर्फबारी ज्यादा नहीं होने से यहां मौसम में बदलाव देखने को मिला है। इसका असर तापमान पर पड़ा है।
विज्ञापन
मौसम-ए-बहार से पहले महका कश्मीर, तस्वीरें
3 of 7
इसके चलते समय से पहले ही घाटी में मौसम-ए-बहार सा अहसास होने लगा है। धूप अच्छी होने से हर तरफ फूल भी खिलने शुरू हो गए हैं। श्रीनगर के रैनावाड़ी इलाके के बादामवाड़ी में बादाम के पेड़ों पर समय से पहले फूल आ गए हैं। यहां पहुंचे मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि उन्हें यह दृश्य देखकर विश्वास नहीं हो रहा था, क्योंकि ऐसा मार्च के आखिरी या फिर अप्रैल के शुरूआती दिनों में देखने को मिलता है।
मौसम-ए-बहार से पहले महका कश्मीर, तस्वीरें
4 of 7
मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस के अनुसार इसके पीछे जो मुख्य कारण है, वह है इस बार जनवरी और फरवरी में बर्फबारी कम होना। मौसम साफ रहने से तापमान में बढ़ोतरी हुई।
विज्ञापन
मौसम-ए-बहार से पहले महका कश्मीर, तस्वीरें
5 of 7
इस सबके कारण बागों में (मेवा बागों) में फूल समय से पहले खिलने शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी बारिश या बर्फबारी के आसार नहीं हैं, यह चिंताजनक है।
विज्ञापन
मौसम-ए-बहार से पहले महका कश्मीर, तस्वीरें
6 of 7
लोटस के अनुसार इस बार फरवरी में जो तापमान रिकॉर्ड किया गया, ऐसा 1949 में रिकॉर्ड किया गया था। 76 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा है। तापमान फरवरी में 20.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। तापमान सामान्य से करीब 10 डिग्री ऊपर है। इस बदलाव का असर अन्य चीजों पर भी पड़ना स्वाभाविक है।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि फूलों का समय से पहले खिलना अच्छा संकेत नहीं है। यह जल्दी खिलेंगे और मार्च के आखिर में बारिश के समय बिखर भी जाएंगे। इससे पैदावार में काफी कमी दर्ज होगी। किसान भी प्रभावित होंगे। यह भी कहा जा रहा कि बर्फबारी नहीं होने से जो ग्लेशियर हैं, उन पर भी प्रभाव पड़ेगा। सर्दी में बर्फ जिस तरह जमा होती है, इस बार नहीं जमीं। गर्मी में पहले से मौजूद ग्लेशियर पिघलेंगे।