घाटी में हिंसा पर काबू पाने के लिए पैलेट गन के विकल्प के रूप में आया पावा शेल सुरक्षा बलों के लिए मुसीबत बन गया है।
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- फोटो : Amar Ujala
हवा के विपरीत रुख से इस शेल के धुएं से जवान खुद ही परेशान हो रहे हैं। यही वजह है कि घाटी में सुरक्षा बल इसका उपयोग करने से बच रहे हैं।
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- फोटो : File Photo
घाटी भेजे गए 1000 पावा शेल में से अब तक कुछ का ही इस्तेमाल किया गया है। विपक्ष के हंगामे तथा पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग पर गृह मंत्रालय ने एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था। इसने इसके स्थान पर पावा शेल के इस्तेमाल की सिफारिश की।
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गृहमंत्री ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के घाटी आने से पहले इस शेल के प्रयोग को मंजूरी भी दे दी। साथ ही तत्काल प्रभाव से घाटी में इसके 1000 शेल भी भेज दिए गए।
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सूत्रों का कहना है कि पहले दिन पावा शेल का इस्तेमाल किया गया, लेकिन, पिछले पांच दिनों से इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
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कारण बताया जा रहा है कि पावा शेल इस्तेमाल करने के दौरान हवा का रुख जवानों की ओर ही हो गया। इसके चलते उनका बुरा हाल हो गया।
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सीआरपीएफ के कमांडेंट और पीआरओ राजेश यादव का कहना है कि पावा शेल के इस्तेमाल में हवा का रुख सबसे महत्वपूर्ण है। हवा के रुख को देखते हुए ही इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि भीड़ पर इसका असर हो सके।
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उनका कहना है कि यह सही है कि हवा का रुख विपरीत होने पर जवानों को इससे पीड़ित होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में पावा शेल आवंटित हो जाएंगे तब इनका हवा के रुख को देखते हुए इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा नहीं है कि इसके इस्तेमाल से बचा जा रहा है।