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‘आधी रात के बाद’: गुनहगारों को पकड़वाने के लिए जज के घर में घुस गया चोर, फिर खूब बजीं तालियां

Tue, 16 Mar 2021 03:59 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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नाटक ‘आधी रात के बाद’ का मंचन - फोटो : अमर उजाला
नटरंग की संडे नाटक श्रृंखला में शंकर शेष के लिखे गए नाटक ‘आधी रात के बाद’ का मंचन किया गया। मोहम्मद यासीन के निर्देशन में नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक देश की न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। इसका मुख्य पात्र एक चोर है, जो अपने सवालों से न्याय व्यवस्था पर कटाक्ष करता है। वह बताता है कि इस न्याय व्यवस्था में जो रसूखदार, पूंजीपति, पैसे वाले हैं वे बड़े से बड़ा गुनाह कर भी बच जाते हैं, जबकि गरीब इसमें मारा जाता है।
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नाटक ‘आधी रात के बाद’ का मंचन - फोटो : अमर उजाला
नाटक ‘आधी रात के बाद’ के मंचन की शुरुआत में चोर एक न्यायाधीश के घर में घुस जाता है, लेकिन वह चोरी करने नहीं, बल्कि खुद को पुलिस से पकड़वाने के इरादे से जज के घर में जाता है। उसने मुंबई की एक चाल में पत्रकार की हत्या होते देखी थी। इस हत्या में रसूखदार बिल्डर का हाथ होता है। अब चोर चाहता है कि उसके सीने में दफन यह राज पुलिस तक पहुंच जाए।
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नाटक ‘आधी रात के बाद’ का मंचन - फोटो : अमर उजाला
उसे डर है कि यदि वह इस मामले के गुनहगारों के हाथ लग गया तो उसे भी मार डालेंगे, इसलिए वह जेल जाना चाहता है, ताकि बचा रहे। जज के घर में घुसते ही उनसे कहता है कि वह उसे पुलिस के हवाले कर दें, लेकिन घर के फोन डेड होने से ऐसा नहीं हो पाता।

 

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नाटक ‘आधी रात के बाद’ का मंचन - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में दोनों के बीच लंबा संवाद होता है, जिसमें चोर न्याय व्यवस्था की कई खामियों को उजागर करता है। इससे जज उससे बहुत प्रभावित होता है।
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नाटक ‘आधी रात के बाद’ का मंचन - फोटो : अमर उजाला
वह जज के सामने हत्या से जुड़े सबूत रखता है, जिसके आधार पर पुलिस कार्रवाई करती है। नाटक में जज के रूप में बृजेश अवतार शर्मा और चोर की भूमिका में सुशांत सिंह चाढ़क ने अभिनय किया। नाटक के दौरान लोगों ने जमकर तालियां बजाईं और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
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