कश्मीर घाटी में अलगाववादियों के बंद और लगातार 12 दिनों से कर्फ्यू के चलते आम जनजीवन पटरी से उतर गया है। लोगों को आवश्यक वस्तुओं के साथ-साथ दवाइयों की किल्लत होने लगी है। सरकार के दावों के विपरीत लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दक्षिणी कश्मीर में आठ जुलाई को हिज़्ब कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही घाटी में परेशानियों का दौर शुरू हो गया था।
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अलगाववादियों के लगातार बंद और उपद्रव से निपटने के लिए लगाए गए कर्फ्यू के चलते आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
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अब हालात यह है कि आम लोगों को आवश्यक वस्तुओं की कमी परेशान करने लगी है। स्थानीय महिला नाज़िया के अनुसार पिछले 12 दिनों से सभी दुकानें और बाजार बंद हैं। न सब्ज़ियां मिल रही हैं, न दूध, न गैस और न ही बेबी फ़ूड।
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बुजुर्ग अजी बानो (85 वर्ष) ने कहा कि वह ह्रदय रोग से पीड़ित हैं। उनके अनुसार उन्हें बंद के चलते काफी दिक्कत हो रही है। दवा नहीं मिलने से वह परेशान हैं।
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उनके अनुसार मंत्रियों का क्या वह अपनी कुर्सियां संभाले बैठे हैं। भुगतना तो आम इंसान को पड़ रहा है। वहीं दवा विक्रेता रियाज़ अहमद के अनुसार बंद के चलते दवाइयों का स्टॉक खत्म होने लगा है।
उनके अनुसार स्टॉकिस्ट को अगर फ़ोन कर स्टॉक पहुंचाने के लिए बोलो, तो वह साफ़ इंकार करते हैं, क्योंकि आवाजाही पर रोक है। रियाज़ के अनुसार मरीजों को दिक्कतें आ रहीं हैं। लोग यही दुआ कर रहे हैं कि हालात जल्द सुधरें और जनजीवन पटरी पर लौटे।