श्रीनगर में मुहर्रम के जुलूस पर कर्फ्यू के दौरान घंटाघर लाल चौक इलाके में सन्नाटा पसरा रहा। बता दें कि मुहर्रम के जुलूस को रोकने के लिए अधिकारियों ने श्रीनगर शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है।
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हाल-ए-कश्मीर
- फोटो : बासित जरगर
कश्मीर घाटी में इस वर्ष भी मुहर्रम पर कोई जुलूस नहीं निकलेगा। सभी कार्यक्रम संबंधित इमामबाड़ों में ही होंगे। जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी थी।
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सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार, इस बारे में प्रशासन पिछले वर्षों की परंपरा का पालन करेगा और किसी भी तरह के जुलूस की अनुमति नहीं देगा।
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ऐसी आशंका है कि इस मौके का इस्तेमाल असामाजिक तत्व सुरक्षाबलों पर हमले के लिए कर सकते हैं।
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अधिकारी ने कहा कि शिया समुदाय के लोगों से 10 दिन की इस अवधि के दौरान सभी धार्मिक कार्यक्रम स्थानीय इमामबाड़ों में करने के लिए कहा गया है।
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मालूम हो कि एक सितंबर से शुरू हुए महर्रम को लेकर शिया समुदाय इन 10 दिनों के दौरान शोक मनाता है।
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कश्मीर में 1990 में जबसे आतंकवाद का दौर शुरू हुआ है तबसे मुहर्रम के जुलूसों को निकालने की अनुमति नहीं है।
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प्रशासन ने एक संकेत के रूप में प्रशासन ने पूर्व मंत्री इमरान अंसारी सहित कुछ शिया नेताओं को सेंटौर होटल के निरोध केंद्र से उनके घरों में स्थानांतरित कर दिया है।
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वहीं जम्मू शहर में शुक्रवार को मुहर्रम पर मातमी जुलूस निकाला गया। अंजुमन-ए-इमामिया जम्मू के बैनर तले स्व. सईद मजहर अली शाह के आवास से निकाला गया जुलूस इमाम बारगाह न्यू प्लॉट पहुंचा।