जम्मू-कश्मीर में पुलवामा के लेथपोरा में 14 फरवरी को हुए सीआरपीएफ की बस पर आत्मघाती हमले में कांस्टेबल सुरिंदर यादव बच गया। सीआरपीएफ की 45 वीं बटालियन की उस बस में 5 जवान सवार थे और केवल सुरिंदर ही बच पाया। सभी जवान उसे यह कह रहे हैं कि उसे दूसरी जिंदगी मिली है। 45 वीं बटालियन के सीओ के अनुसार सुरिंदर ने काजीगुंड में बस बदली, इसी के चलते वो बच गया जबकि बाकी के 4 जवान शहीद हो गए।
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pulwama attack
उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया निवासी कांस्टेबल (ड्राईवर) सुरिंदर यादव के चेहरे पर अपने साथियों को खोने का दुख जरूर है, लेकिन उसके साथी उसे खुशकिस्मत मान रहे हैं क्योंकि घटना से कुछ देर पहले ही सुरिंदर ने बस बदली और वो बच गया, लेकिन जवानों की सूची में उसका भी नाम था, जिसके चलते पहले सभी ने यह माना कि वो भी शहीद हो गया।
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सुरिंदर ने बताया कि जिस बस को निशाना बनाया गया वो उससे तीन बस पीछे थे और जैसे ही विस्फोट की आवाज सुनाई दी तो एक आग का बड़ा गोला उठता दिखा। उन्होंने बताया कि बस करीब 30 फीट हवा में उछली और उसके टुकड़े दूर-दूर तक फैल गए। उसमें जितने जवान सवार थे उनके शव इधर-उधर जा बिखरे। हम लोग जहां थे वहां पोजीशन ले लिए।
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पुलवामा में आतंकियों ने आईईडी धमाका किया था
सुरिंदर ने कहा कि उस बस में मेरे चार मित्र शहीद हुए। जम्मू से जब हम निकले तो हमें दो बस का नंबर मिला तो मैं पहली बस में बैठ गया और दोस्त दूसरी बस में, लेकिन घटना से पहले जब बस एक जगह रुकी तो दोस्तों ने कहा कि अब हमारे साथ बैठ जाओ और मैं बैठ गया, जिसकी वजह से मैं बच गया। हमें सदमे से बाहर निकालकर उन बातों को भुलाकर आतंकियों के खिलाफ जंग जारी रखते हुए उनसे बदला लेना है।
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एक अन्य जवान जो उस काफिले में शामिल थे हवलदार सुनील कुमार ने कहा कि जिस बस को निशाना बनाया गया उसके पीछे चौथी बस में हम सवार थे। उन्होंने कहा कि पहले तो हम सदमे में थे, लेकिन बाद में सुरक्षित अवंतीपोरा स्थित सीआरपीएफ 130 बटालियन के कैंप में चले गए। सुनील ने कहा कि मैं आतंकियों को संदेश देना चाहता हूं, हमारा हौसला बुलंद है और हम इसका बदला जरूर लेंगे।
सीआरपीएफ कांस्टेबल सुरिंदर यादव
- फोटो : अमर उजाला
सीआरपीएफ की 45 बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर इकबाल अहमद ने बताया कि खबर सुनते ही पहले शॉक लगा कि इतनी आरओपी व अन्य सुरक्षा के होते हुए भी ऐसा कैसे हुआ, लेकिन बाद में पता चला कि आत्मघाती हमलावर था, जिसने बारूद से भरी गाड़ी से बस को निशाना बनाया है। उन्होंने बताया कि तुरंत पता किया कि जम्मू से हमारी बटालियन के कुल 39 जवान इस काफिले में थे और यह भी जानकारी मिली कि जिस बस को निशाना बनाया गया उसमें 5 हमारी बटालियन के जवान थे, जिनके शहीद होने की गुंजाइश पूरी थी। इकबाल ने बताया कि अधिक जानकारी हासिल करने पर यह पता चला कि उन पांच में से एक जवान उस समय दूसरी गाड़ी में चढ़ा गया। इसी कारण वो बच गया जबकि बाकी के चार शहीद हो गए।