रोजाना हजारों मीट्रिक टन सब्जियां खराब हो जा रही हैं
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बीते साल भी 30 करोड़ रुपये के आसपास नुकसान हुआ था। मौजूदा समय में तैयार मशरूम बेचने के लिए मंडी नहीं मिल पा रही। मंडियों में बेचा भी गया तो उम्मीद से कम दाम मिल रहे हैं। अब तैयार हो चुकी भिंडी, घिया, शिमला मिर्च, आलू, पालक और अन्य फसलों को भी लोकल मंडियां नहीं उठा रहीं। इससे उत्पादकों को नुकसान हो रहा है।