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तस्वीरें: बदल रही है कश्मीर की फिजाएं, अब आतंकियों नहीं शहीदों के जनाजे में उमड़ती है भीड़

Thu, 08 Oct 2020 07:00 AM IST
प्राची प्रियम अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
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कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के जनाजे में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
कश्मीर घाटी की फिजाओं में अब बदलाव देखने को मिल रहा है। वो कश्मीर जहां हर आतंकी के जनाजे में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती थी, राष्ट्र विरोधी नारेबाजी हुआ करती थी। आज उसी कश्मीर में शहीद जवानों के जनाजों में सैकड़ों लोग शामिल होते दिखाई पड़ते हैं।

 
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कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के शव को कंधा देते पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
हालांकि, कश्मीर में कोरोना महामारी के चलते लोगों को एक जगह जमा होने पर पाबंदियां लगाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। ऐसी ही एक मिसाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के श्रीनगर के ईदगाह स्थित घर पर देखने को मिली, जब उनके जनाजे में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। 

 
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रोते बिलखते कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिजन - फोटो : अमर उजाला
कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन मंगलवार शाम गांदरबल जिले के नुनर इलाके में भाजपा नेता को बचाने में आतंकियों की गोली का शिकार हो गए। जनाजे में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि अल्ताफ मेरा भाई था जिसने अपनी जान अपने फर्ज के लिए न्योछावर कर दी है। हमें उसकी शहादत पर गर्व है। उसने कहा कि अल्ताफ एक जिंदा दिल इंसान था और हमेशा से ही उसे पुलिस में जाने का शौक था। 

 

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रोते बिलखते कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिजन - फोटो : अमर उजाला
पिछले कुछ समय से भाजपा नेताओं को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद परिवार वालों ने कई बार उसे भाजपा नेताओं के साथ न रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह हमेशा कहता था मैं ठीक हूं और अपनी ड्यूटी सही से अंजाम दे रहा हूं, इसमें डरने वाली कोई बात नहीं। 

 
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रोते बिलखते कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिजन - फोटो : अमर उजाला
परिवार में अकेले कमाने वाले थे अल्ताफ
आतंकी हमले में शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिवार में उनकी मां, उनकी पत्नी, 18 माह का बेटा और दो छोटे भाई हैं। वहीं दो बहनों की शादी हो चुकी है। अल्ताफ ही परिवार में एक मात्र कमाने वाले थे।  

 
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कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के बेटे को गोद में लिए हुए परिजन - फोटो : अमर उजाला
इस वर्ष आतंकी हमलों में 22 जवान हो चुके हैं शहीद
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष अब तक सुरक्षाबलों पर 91 हमले हो चुके हैं। इनमें से 34 अर्ध सैनिक बलों, 25 जम्मू-कश्मीर पुलिस, 24 जनप्रतिनिधियों, सेना पर सात और एक बैंक गार्ड पर हुए हैं। इन हमलों में 19 नागरिक और जनप्रतिनिधि, 10 अर्द्ध सैनिक बलों के जवान, 9 पुलिस कर्मी और सेना के तीन जवान शहीद हो चुके हैं।
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