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एक बार फिर आतंकियों ने लिया मस्जिद का सहारा, जानिए कब-कब धर्मस्थलों में घुसे दहशतगर्द

Fri, 09 Apr 2021 02:03 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
कश्मीर के शोपियां और त्राल में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। जिसमें अब तक अंसार गजवा-तुल-हिंद के टॉप कमांडर इम्तियाज समेत सात आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है। हालांकि सुरक्षबलों ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने के कई मौके दिए। बावजूद इसके आतंकी सुरक्षाबलों को निशाना बनाते रहे। शोपियां में आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए एक बार फिर धर्मस्थलों को बदनाम करने की नापाक हरकत की है। मस्जिद में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी की। इससे पहले भी कई बार आतंकी ऐसी घिनौनी हरकत कर चुके हैं। जानिए आतंकियों द्वारा धर्मस्थलों की आड़ लेकर लोगों की भावनाओं से खेलने की साजिश...
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आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ - फोटो : साकिब नबी
साल 2020 के जुलाई महीने में सोपोर में मस्जिद में छिपे आतंकियों ने सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला किया था। इसी साल 19 जून को भी पुलवामा जिले के पांपोर में हमला करने के बाद आतंकी मस्जिद में छिप गए थे। सुरक्षाबलों ने इन्हें बाहर निकाल कर मारा था। आम तौर पर आतंकी इस तरह की गतिविधियां 90 के दशक में अमल में लाते थे। बीच में यह सिलसिला बंद हो गया था।
  
 
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आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
कश्मीर घाटी में आतंकी मानसिक युद्ध भी लड़ रहे हैं। यह उनकी धर्मस्थलों की आड़ लेकर स्थानीय लोगों की भावनाओं से खेलने की साजिश भी है। इसलिए सुरक्षाबलों पर हमला करने से पहले व बाद वे धर्मस्थलों की शरण लेते हैं, ताकि इनकी जान बच जाए। यदि सुरक्षाबल कठोर कार्रवाई करें और इसमें धर्मस्थलों को नुकसान पहुंचे तो उसे धार्मिक रंग देकर लोगों को भड़काया जा सके।

 

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आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
19 जून 2020 को पुलवामा जिले के पांपोर के मीज इलाके में भी दहशतगर्दों ने ऐसी ही साजिश रची थी, परंतु सुरक्षाबलों ने अपनी सूझबूझ से इसे नाकाम कर दिया था। सुरक्षाबलों ने विशेष रणनीति के तहत मस्जिद को नुकसान पहुंचाए बिना आंसू गैस का प्रयोग कर आतंकियों को बाहर निकालकर ढेर कर दिया था। सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन की स्थानीय लोगों ने भी तारीफ की थी।

 
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आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला
पहले भी धर्मस्थलों में छिप चुके हैं आतंकी
1996 में जेकेएलएफ कमांडर बशारत रजा और शब्बीर सिद्दीकी ने दो दर्जन साथियों समेत दरगाह में पनाह ली थी। उन्होंने दरगाह की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकी मारे गए। इस दौरान तीन पुलिसकर्मी भी शहीद हुए थे।
  
 
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आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
मार्च 1995 में बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ इलाके में स्थित सूफी संत शेख नूरूद्दीन नूरानी की दरगाह में हरकत उल अंसार और हिजबुल के आतंकियों ने पनाह ली थी। 66 दिन तक आतंकी इसी दरगाह में छिपे रहे थे। 12 मई को मुठभेड़ में नौ पाकिस्तानियों समेत 25 आतंकी मारे गए थे। 15 अक्तूबर 1993 को 40 आतंकी हजरतबल दरगाह में करीब एक महीने तक छिपे रहे। 16 नवंबर को आतंकियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
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