एशिया की सबसे बड़ी स्मार्ट टनल में आपदा प्रबंधन का पुख्ता इंतजाम किया गया है। आतंकी हमले की स्थिति में 90 सेकेंड में सुरक्षा बल स्पाट पर पहुंच जाएंगे और चार मिनट के अंदर आतंकियों का सफाया हो जाएगा।
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Nashri Tunnel
- फोटो : Amar Ujala
वैसे टनल के सुरक्षा प्रबंध इतने मजबूत हैं कि आतंकी इस टनल में प्रवेश ही नहीं कर पाएंगे। विश्व स्तरीय अति आधुनिक तकनीक से लैस इस इंटेलीजेंट टनल में वाहनों की स्कैनिंग से लेकर अंदर बैठे यात्रियों पर भी इलेक्ट्रानिक आंखें नजर रखेंगी।
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इंजीनियरिंग का कमाल एशिया की सबसे लंबी टनल चिनैनी-नाशरी
टनल में ओवरटेकिंग की भी कोशिश हुई तो वाहन चालक धरे जाएंगे। यह पूरी तरह मानव रहित टनल है और सभी कंट्रोल सिस्टम पूर्णत: कंप्यूटरीकृत हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2 अप्रैल को इस टनल का उद्घाटन करने वाले हैं।
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इंजीनियरिंग का कमाल एशिया की सबसे लंबी टनल चिनैनी-नाशरी
चिनैनी को नाशरी से जोड़ने वाली इस सुंरग में विश्व की सबसे आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सारा नियंत्रण होगा। टनल में घुसने से पहले वाहन चालकों को अपने वाहन में एफएम चालू करना होगा जिससे उन्हें सारी सूचनाएं मिल सकेंगी।
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Nashri Tunnel
- फोटो : file photo
टनल 9 किलोमीटर लंबी है और इसके समानांतर 9 किलोमीटर लंबा एस्केप टनल भी है जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में हो सकेगा। इस समानांतर टनल को क्रास पैसेज द्वारा मुख्य टनल से जोड़ा गया है। इन क्रास पैसेज की लंबाई एक किलोमीटर है। इस तरह इसकी कुल लंबाई 19 किलोमीटर हो जाती है।
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टनल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
- फोटो : Amar Ujala
टनल के अंदर घुसते ही वाहन के एफएम से यात्रियों का स्वागत होगा। इस टनल को पार करने में ट्रायल के दौरान इस संवाददाता को कुल दस मिनट लगे। टनल प्रबंधन की घोषणाओं में कूड़ा कचरा नहीं फेंकने और ओवरटेक नहीं करने की सलाह दी जाती है। पहले यह दूरी 41 किलोमीटर की थी। इस तरह श्रीनगर जाने में अब दो घंटे की बचत हो सकेगी।
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इंजीनियरिंग का कमाल एशिया की सबसे लंबी टनल चिनैनी-नाशरी
टनल बनाने वाली कंपनी आईएल एंड एफएस के रीजनल हेड आशुतोष चांदवाड़ ने बताया कि टनल बनने से हर दिन 27 लाख रुपये के ईंधन की बचत होगी। आग लगने या अन्य बाहरी हस्तक्षेप से बाधा की स्थिति में आटोमेटिक सिस्टम स्थल की पहचान करेगा और कंट्रोल सेंटर सक्रिय हो जाएगा।
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Nashri Tunnel
- फोटो : Amar Ujala
अग्निशमन दस्ते और सुरक्षा बल पहुंच जाएंगे। यात्रियों को क्रास पैसेज से समानांतर टनल ले जाकर बाहर निकाला जा सकेगा। हर 300 मीटर पर क्रास पैसेज बने हैं। इनकी संख्या 29 है।
टनल में अभी विश्व की सबसे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। दुनिया में जब कभी तकनीक अपग्रेड होगी तो यह इस टनल में पहुंच जाएगी। सेंसर से मानिटरिंग हो रही है। जब कभी कार्बन मोनोक्साइड का स्तर बढ़ेगा तो सिस्टम उसकी पहचान कर स्वत: आक्सीजन के स्तर को बहाल कर देगा।