हिमाचल प्रदेश पालमपुर के घुग्गर गांव के रहने वाले विक्रम बत्रा सोपोर में 13 जैक राइफल्स में लेफ्टिनेंट पद पर कमीशन होकर सोपोर में तैनात हुए। विक्रम का जन्म 9 सितंबर 1974 को हुआ था।
विज्ञापन
2 of 7
vikram batra
- फोटो : File Photo
कारगिल युद्ध में डेल्टा कंपनी को 19 जून को प्वाइंट 5140 फतह करने का जिम्मा दिया गया। कैप्टन विक्रम बत्रा को शेर शाह कोड नाम दिया गया, जिसका जिक्र पाकिस्तानी इंटरसेप्ट में अक्सर आता था।
विज्ञापन
3 of 7
vikram batra
- फोटो : ADGPI- Indian Army
प्वाइंट 5140 को जीत दिलाने के बाद दुश्मन के कई मोर्चे ध्वस्त करने में बत्रा की भूमिका अहम रही। हर मोर्चे की जीत का ये दिल मांगे मोर कहकर संदेश देने वाले विक्रम बत्रा टीवी पर इंटरव्यू चलने से देश में प्रसिद्ध हो गए।
4 of 7
vikram batra
- फोटो : File Photo
7 जुलाई 1999- कारगिल युद्ध की सबसे मुश्किल चुनौतियों में शुमार प्वाइंट 4875 का मोर्चा अब भी लोहे के चने चबाने जैसा था। ऊपर चढ़ने की संकरी जगह के ठीक सामने दुश्मन का मोर्चा ऐसी पोजीशन पर, जहां तक पहुंचने का एक ही रास्ता और उस पर दुश्मन की बंदूकें तनी हुईं।
विज्ञापन
5 of 7
vikram batra
- फोटो : File Photo
बिजली की गति से दुश्मन के मोर्चे पर धावा बोलकर कैप्टन विक्रम बत्रा ने पहले हैंड टू हैंड फाइट की और उसके बाद प्वाइंट ब्लैक रेंज से पांच दुश्मन ढेर कर दिए। गहरे जख्म होने पर भी बत्रा यहीं नहीं रुके। वे क्रालिंग करते हुए दुश्मन के करीब तक पहुंचे और ग्रेनेड फेंकते हुए पोजीशन को क्लियर कर दिया।
विज्ञापन
6 of 7
vikram batra
- फोटो : File Photo
टीम का नेतृत्व कर रहे विक्रम बत्रा ने अपनी टीम में पूरी ताकत के साथ लड़ने का जुनून भर दिया। जब जख्मी विक्रम बत्रा को उनके सूबेदार ने रेस्क्यू करने की कोशिश की तो वे बोले तू बाल बच्चेदार है, हट जा पीछे।
इसके बाद दुश्मन की गोली से विक्रम बत्रा शहीद हो गए। बाद में उनकी टीम ने प्वाइंट 4875 को वापस कब्जाने का लक्ष्य हासिल कर लिया। विक्रम बत्रा के अदम्य साहस और नेतृत्व प्रदर्शन के लिए उन्हें परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया।