भारत-पाक सीमा पर पर्यटन विभाग द्वारा बैसाखी मेले के आयोजन में बुधवार को संस्कृति के रंगों की छठा बिखर गई। भांगड़ा, गिद्दा से पूरा सुचेतगढ़ बैसाखी की मस्ती में झूम उठा।
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- फोटो : Amar Ujala
मेले का उद्घाटन मंत्रोच्चारण के साथ सिंचाई मंत्री चौ. शाम लाल ने किया। कलाकारो ने डोगरी, पंजाबी, हिन्दी, कश्मीर, लदखी आदि संस्कृति पर लोकनृत्य कर पंडाल में बैठे लोगों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।
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इस दौरान सीमा सुरक्षा बल के जवान व अधिकारी भी ढोल की थाप पर नाचते हुए दिखे। भारत-पाकिस्तान सीमा पर आयोजित बैसाखी का मेला देखने के लिए पहुंचे लोगों ने मेले का मजा लेने के साथ लगे स्टालों पर खरीददारी करने के साथ खाने-पीने के स्टाल पर लोगों का जमावड़ा लगा रहा।
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भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे सुचेत गढ़ में आए दिन कई कार्यक्रमों का आयोजन होने पर पाकिस्तान क्षेत्र के ग्रामीण व पाकिस्तान रेंजर्स अपने क्षेत्र में भारतीय गीत की धुनों का मजा लेते हुए देखे जा सकते है।
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बुधवार को सीमा से पांच सौ मीटर की दूरी पर पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित बैसाखी मेला तीन दिन चलेगा। पहले दिन मेला देखने पहुंचे यहां भारतीय लोग मेले का मजा लेते दिखे।
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वहीं पाकिस्तान क्षेत्र में खेतों में कार्य करने पहुंचे पाकिस्तान के किसान व कई लोगों को सीमा पर चल रहे मेले की गूंज सुनकर पंजाबी व हिन्दी गीतों पर थिरकते कलाकारों को देखते हुए देखा गया।
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मेले के दौरान मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल के जवान व अधिकारी पाकिस्तान क्षेत्र की ओर हर पल कड़ी नजर रख चल रही गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे।
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मेले के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद सिंचाई मंत्री चौ. शाम लाल ने कहा कि मेले में मौजूद लोगों सहित राज्य व देश के लोगों को बैसाखी पर्व की शुभकामना देने के साथ बैसाखी पर्व का महत्व बताया।
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उन्होंने कहा कि कई युगों से बैसाखी पर्व पर गेहूं की फसल पककर तैयार होने पर किसान मेले का आयोजन कर खुशी मनाते है।