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Baba Chamliyal Mela: भारत-पाक सीमा पर 22 को जून को लगेगा बाबा चमलियाल मेला, दोनों ओर रहता है बेसब्री से इंतजार

Tue, 13 Jun 2023 03:42 PM IST
kumar गुलशन कुमार राजन चौधरी, रामगढ़

सार

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के करीब आयोजित होने वाले बाबा चमिलयाल का मेला इस बार 22 जून को लगने जा रहा है। जम्मू संभाग के जिला सांबा के रामगढ़ क्षेत्र के दग गांव में ये मेला हर साल आयोजित होता है।
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Baba Chamliyal Mela 2023 - फोटो : राजन चौधरी
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के करीब आयोजित होने वाले बाबा चमिलयाल का मेला इस बार 22 जून को लगने जा रहा है। जम्मू संभाग के जिला सांबा के रामगढ़ क्षेत्र के दग गांव में ये मेला हर साल आयोजित होता है। ये जगह अपने साथ दोनों देशों के इतिहास को समेटे हुए है। मेले के दौरान पाकिस्तान की तरफ चादर चढ़ाई जाती है और इसके बदले में भारत से सीमा पार शक्कर और शरबत भेजी जाती है।

लेकिन बदले हालातों के चलते कई बार न तो चादर पहुंचती है और न ही इस ओर से शक्कर और शरबत सरहद पार जा पाती है। लेकिन फिर सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों को इस मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है। उधर, सरहद पार पाकिस्तान के सैंदावली गांव में भी बाबा की एक मजार है। यहां पर मेले का आयोजन होता है। पाकिस्तान में एक हफ्ते तक मेला लगता है।
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Baba Chamliyal Mela 2023 - फोटो : राजन चौधरी
मेले को लेकर तैयारियां जारी

मेले को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। सांबा जिला प्रशासन भी मेले को सफल बनाने के लिए जुटा हुआ है। बाबा चमलियाल प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष बिल्लू चौधरी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उपायुक्त ने टूटे मार्ग की मरम्मत के निर्देश दिए हैं। रंग-रोगन का काम पूरा हो चुका है।

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Baba Chamliyal Mela 2023 - फोटो : राजन चौधरी
यह है बाबा चमलियाल मेले का इतिहास

बताया जाता है कि करीब तीन सौ साल पहले गांव दग में बाबा दलीप सिंह मन्हास रहते थे। वह चंबल व चर्म रोग का इलाज करते थे। बाबा दलीप सिंह की मशहूरी बढ़ती देख कुछ लोगों ने बाबा को मारने की ठान ली। एक दिन बाबा को उन्होंने इलाज के बहाने सैंदावाली गांव (अब पाकिस्तान में) बुलाया। बाबा घोड़े पर सैंदवाली जा रहे थे तो गांव से कुछ दूरी पर कुछ लोगों ने घात लगा वार कर बाबा की गर्दन काट दी। गर्दन वहीं गिर गई।

घोड़ा बाबा का बिना गर्दन शरीर ले कर दग गांव पहुंचा तो वहां एक महिला कुंए से पानी भर रही थी। यहां बाबा का शरीर भूमि में समा गया। इस जगह पर आज दरगाह है। बाबा का घोड़ा भी वहीं समा गया था। इसके बाद एक रात बाबा ने अपने एक भक्त को दर्शन दिए व कहा कि आमुक स्थान पर बने तालाब की मिट्टी शक्कर व कुंए के पानी की शरबत के लेप से पुराने से पुराना चर्म रोग का उपचार हो सकेगा। यहां अब बाबा की मजार है, जिसे बाबा चमलियाल के नाम से जाना जाता है।

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Baba Chamliyal Mela 2023 - फोटो : राजन चौधरी
पाकिस्तान से आती है चादर

यह भी कहा जाता है कि भारत-पाक के बंटवारे से पहले से वहां के श्रद्धालु बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने आया करते थे। और शक्कर-शरबत ले जाते थे। बाद में हालात बिगड़ने पर पाक के श्रद्धालु केवल चादर ही भेजते हैं, जिसे भारतीय सुरक्षा बल के अधिकारी बाबा की मजार पर चढ़ाते हैं।

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Baba Chamliyal Mela (File) - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान के सैंदाबाली में भी बाबा की मजार

बाबा की एक मजार पाकिस्तान के सैंदाबाली में भी है। पाकिस्तानी श्रद्धालु भी बाबा को मानते हैं। वहां मजार को बाबा दिलीप शाह के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान में मेला सप्ताह तक चलता है। बाबा चमलियाल मेले में जम्मू-कश्मीर के अलावा बाहरी राज्यों के लोग भी पहुंचते हैं और प्रसाद के रूप में शक्कर शरबत ले जाते हैं।
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