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जम्मू-कश्मीर से अनुछेद 370 व 35ए खत्म, कैसे हैं घाटी के हालात, जानने के लिए देखें सात तस्वीरें

Mon, 05 Aug 2019 07:26 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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कर्फ्यू जैसा मंजर - फोटो : अमर उजाला
अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद घाटी में तैनाती के लिए आठ हजार और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को रवाना किया गया है। पूरे राज्य में सोमवार सुबह से ही अघोषित कर्फ्यू के हालात हैं। कश्मीर में मोबाइल फोन के साथ ही लैंडलाइन व ब्रॉडबैंड की सेवा भी ठप कर दी गई है। पूरे राज्य में धारा 144 लागू है। मोबाइल इंटरनेट सेवा ठप है। सड़कों से सार्वजनिक वाहन गायब रहे। स्कूल-कालेज बंद रहे। दुकानों तथा प्रतिष्ठानों पर ताले लटके रहे। जम्मू में एहतियातन सेना की छह टुकड़ियों को तैनात किया गया है। 
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कर्फ्यू जैसा मंजर - फोटो : अमर उजाला
सेना और वायु सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से अर्द्धसैनिक बलों के आठ हजार जवानों को एयरलिफ्ट करके सी-17 विमान से कश्मीर भेजा गया। इससे पहले 10 हजार और फिर 28 हजार जवानों को घाटी में भेजा गया था। अब तक 46 हजार अतिरिक्त जवानों को राज्य में भेजा जा चुका है।
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कर्फ्यू जैसा मंजर - फोटो : अमर उजाला
लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन: महबूबा
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन है। आज 1947 की तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा टू नेशन थ्योरी को रिजेक्ट करने का फैसला गलत साबित हुआ है। सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक है। एक अन्य ट्वीट में कहा कि मैं पहले ही अपने घर में नजरबंद हूं और मुझे किसी से मिलने की इजाजत नहीं है। मैं आश्वस्त नहीं कि मुझे कितनी देर सबसे बात करने की इजाजत मिलेगी, क्या यह वही भारत है जिसमें हमारा विलय किया गया था।

 

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कर्फ्यू जैसा मंजर - फोटो : अमर उजाला
लोगों के विश्वास के साथ धोखा: उमर
पूर्व मुख्यमंत्री व नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लिए गए एकपक्षीय और चौंकाने वाले फैसले ने उस विश्वास के साथ धोखा किया है, जिसके साथ राज्य के लोग 1947 में भारत के साथ आए थे। इस फैसले के दूरगामी और बेहद गंभीर परिणाम होंगे। यह एलान उस वक्त किया गया, जबकि पूरी कश्मीर घाटी सैन्य छावनी के रूप में तब्दील हो चुकी है। केंद्र का फैसला एक पक्षीय, अवैध और असांविधानिक है। नेशनल कांफ्रेंस इसे चुनौती देगी।

 
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कर्फ्यू जैसा मंजर - फोटो : अमर उजाला
ऐतिहासिक फैसले का स्वागत: रैना
भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख रवींद्र रैना ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत है। जम्मू कश्मीर की जनता उनके दर्द को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रगुजार रहेगी। अपनी जाति, पंथ और धर्म की परवाह किए बगैर जम्मू कश्मीर के लोग प्रधानमंत्री के साथ हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में जब यहां की जनता भीषण बाढ़ का प्रकोप झेल रही थी तब मोदी कश्मीरियों के पास आने वाले पहले शख्स थे। उन्होंने उनसे मुलाकात की और उनकी सुरक्षा की हर संभव कोशिश की। 
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देश को 70 साल से था इंतजार : निर्मल सिंह
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने कहा कि समूचा देश इस क्षण के लिए 70 साल से इंतजार कर रहा था। केंद्र का यह फैसला राज्य के साथ उसके संबंध को आगे और मजबूती देगा। जम्मू कश्मीर की जनता के दीर्घकालिक सपने के पूरा होने की उम्मीद जगी है। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार सरदार पटेल के अधूरे काम को पूरा करने का काम कर रही है, जिन्होंने मजबूत भारत की नींव रखने के लिए जम्मू कश्मीर समेत 562 रियासतों का विलय किया था।
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कर्फ्यू जैसा मंजर - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेकां संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को खुश करने के लिए जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने के लिए अनुच्छेद 370 का प्रावधान किया। शुरुआत हो चुकी है और इसके तर्कसम्मत निष्कर्ष निकलेंगे।
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