अनुच्छेद 370 हटने के बाद पांच दिन से कश्मीर बंद है। इसका सबसे ज्यादा असर कश्मीर के सेब पर पड़ा है। पिछले पांच दिन में कश्मीर से जम्मू और अन्य राज्यों में होने वाली 2 हजार टन सेब की आपूर्ति रुक गई है। इससे सेब के कारोबारियों को काफी नुकसान हुआ है। खासकर दूसरे राज्यों के कारोबारियों को, जो सेब के पकने से पहले ही कश्मीर के व्यापारियों से सेब के बगीचे खरीद लेते हैं। सेब कश्मीर में तोड़ा भी नहीं जा पा रहा।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
जानकारी के अनुसार इस समय कश्मीर में सेब की दो किस्में (रजाकबारी और हजरतबली) की आपूर्ति हो रही थी। अगस्त में यह दोनों किस्में तैयार होकर मार्केट में होती है। जुलाई के मध्य में ही यह पक जाती है। जम्मू कश्मीर की सबसे बड़ी फल सब्जी मंडी नरवाल जम्मू में हर रोज इन दोनों किस्मों का सेब आ रहा था।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
नरवाल फल मंडी के प्रधान परवीन गुप्ता का कहना है कि जम्मू मंडी में हर रोज 20 ट्रक सेब आता था। यहां से वह जम्मू के अन्य हिस्सों और दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। कई ट्रकों में 8 टन और कई ट्रकों में 12 से 13 टन सेब आता है। कुल मिलाकर औसतन हर रोज 200 टन सेब जम्मू आता था, लेकिन पांच दिन से सेब नहीं आ रहा।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
गुप्ता का कहना है कि कश्मीर से नाशपाती भी आती थी। बंद के चलते इसकी सप्लाई भी रुकी है। जानकारी के अनुसार जम्मू मंडी के अलावा कश्मीर से सीधे तौर पर हर रोज 20 ट्रक सेब बाहर जाता था। यह सेब भी पांच दिन से नहीं जा पाया है। पिछले पांच दिन से लगभग 2 हजार टन सेब कश्मीर से बाहर नहीं जा सका है।
आगे भी संकट रह सकता है
जिस तरह से कश्मीर के हालात हैं, इसका असर अगले एक-दो माह तक देखने को मिल सकता है। यदि ऐसा ही रहा तो सितंबर में मार्केट में आने वाली सेब की अन्य किस्में डिलिशियस एप्पल, रेड एप्पल, रसभरी आदि पर भी इसका असर पड़ सकता है।