सेना के जांबाज जवान अपने साहसिक जज्बे से देश को गौरवान्वित करते रहते हैं। फिर चाहें वो लद्दाख की ऊंची चोटियां हों या सियाचिन के दुर्गम इलाके, सेना के जवान मुस्तैदी से देश की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
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भारतीय सेना
- फोटो : बासित जरगर
सीमाओं पर तैनात भारतीय सेना के जवान आसपास के इलाकों के नागरिकों को चैन से जीने के लिए सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं।
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भारतीय सेना
- फोटो : बासित जरगर
इस दौरान जवानों को दुश्मन के साथ ही प्राकृतिक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। लेकिन इस तरह की चुनौतियों को सेना कभी अपने लक्ष्य में बाधा नहीं बनने देती।
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भारतीय सेना
- फोटो : बासित जरगर
जवानों के इसी पराक्रम को देश का हर इंसान सलाम करता है।
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भारतीय सेना
- फोटो : बासित जरगर
सेना के पराक्रम और जरूरतमंदों के लिए देवदूत बनने की एक ऐसी है कहानी इसी साल के जनवरी महीने की है। जब बारामुला जिले के दर्दपोरा गांव में बर्फबारी में फंसी एक गर्भवती की सेना ने देवदूत बनकर मदद की। शमीमा नाम की इस महिला को अस्पताल में तत्काल भर्ती कराने की जरूरत थी। परिवार वालों की मदद की गुहार पर 150 जवानों और 30 नागरिकों ने छह घंटे पैदल चलकर उसे अस्पताल पहुंचाया। जहां उसने बच्चे को जन्म दिया।
बता दें कि शमीमा प्रसव पीड़ा से तड़पने लगी। बर्फबारी के कारण आसपास के सारे रास्ते बंद हो गए थे। ऐसे में उसे घर से बाहर ले जाना काफी मुश्किल था। परिवार के लोगों ने सेना से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद सेना के 150 जवानों और 30 नागरिकों ने उसे स्ट्रेचर पर लेकर बटालियन हेडक्वार्टर अपलोना तक का साढ़े चार किलोमीटर का रास्ता तय किया। एक पार्टी रास्ते भर बर्फ हटाकर रास्ता बना रही थी। अपलोना में महिला का मेडिकल चेकअप और आवश्यक दवाएं देने के बाद उसे सेना की एंबुलेंस से बारामुला जिला अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों ने सुरक्षित प्रसव कराया। इस दौरान जवान अस्पताल के बाहर मौजूद रहे ताकि आपात स्थिति में मदद की जा सके।