अपराजिता
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विश्वविद्यालयों में महिला अपराध से जुड़े मामलों पर शोध कर इसके कारणों और समाधान का प्रयास किया जाना चाहिए। ड्रग्स, शराब सेवन पर प्रतिबंध लगे। पोर्न साइट्स पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए। इस प्रकार की घटनाएं केवल कानून भर बनाने से नहीं रुकेंगी। कानून का शत प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित होना चाहिए। ऐसी घटनाओं को धर्म एवं राजनीति से जोड़ने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
किसने, क्या कहा
इस घटना ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया। इन सभी घटनाओं की वजह है समाज में जागरूकता का अभाव। हमें घर से ही इस बारे में जागरूकता लाने का काम करना चाहिए। दोषियों को नपुंसक बनाकर सभी सोशल मीडिया और अखबारों की सुर्खियों में लाया जाना चाहिए ताकि कोई भी ऐसी हरकत करने के बारे में सोचे भी नहीं।- डॉ अमिता मेहता, साहित्यकार
सिर्फ किसी एक को बदलने से कुछ नहीं होगा, जरूरत है समाज की सोच को बदलने की। इन सभी घटनाओं को तभी रोका जा सकता है जब हम हर क्षेत्र में बदलाव लाने की कोशिश करें। स्कूलों में सेल्फ डिफेंस सिखाया जाना चाहिए। टेक्नॉलाजी भी इसमें काफी अच्छी भूमिका निभा सकती है। सरकार को चाहिए कि जिन आईआईटी पर वह इतना पैसा लगाते हैं उन्हें यह काम सौंपा जाए कि वह ऐसे डिवाइस तैयार करें जिससे महिलाएं कहीं भी 5 से 10 मिनट के अंदर किसी को मदद मिल सके। - डॉ श्वेता कोहली, असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू