दशनामी अखाड़ा के महंत दीपेंद्र गिरि के नेतृत्व में शनिवार को छड़ी मुबारक के पहलगाम की लिद्दर नदी में पूजन-विसर्जन के साथ अमरनाथ यात्रा का समापन हो गया। इसमें देशभर से आए साधु संतों ने जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए प्रार्थना की।
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amarnath yatra
- फोटो : Amar Ujala
इससे पूर्व श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन पर छड़ी मुबारक ने पवित्र गुफा में अंतिम दर्शन किए थे। इस साल 2.20 लाख श्रद्धालु ही बाबा बर्फानी के दरबार तक पहुंच सके। कश्मीर हिंसा का यात्रा पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
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अमरनाथ यात्रा
- फोटो : PTI
यात्रा रूट पर छड़ी मुबारक ने दशनामी अखाड़ा से पहलगाम के विभिन्न मंदिरों से होते हुए चंदनबाड़ी, शेषनाग, पंचतरणी, पवित्र गुफा से वापस होते हुए पहलगाम का रूट तय किया। इस दौरान सुरक्षा के तगड़े इंतजाम रखे गए थे। महंत दीपेंद्र गिरि ने राज्य के लोगों से शांति और भाईचारे बनाए रखने की अपील की।
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Amarnath yatra
- फोटो : Amar Ujala
उन्होंने अमरनाथ यात्रा को आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू करके श्रावण पूर्णिमा तक चलाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि यात्रा की अवधि के बजाय खासकर तौर पर शेषनाग और पंचतरणी में ढांचागत सुविधाओं को विकसित करने पर काम किया जाए। 20-25 हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था करके यात्रा का आंकड़ा बढ़ाया जा सकता है।
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Amarnath yatra
- फोटो : Amar Ujala
हिंदू यात्राओं से कश्मीर का आम आदमी जुड़ा रहा है। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने के लिए राज्य प्रशासन, सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, जेएंडके पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, पीएचई, पीडब्ल्यूडी सहित अन्य एजेंसियों और विभागों का धन्यवाद किया।
गिरि की अध्यक्षता में वर्ष 2004 में द ट्रू ट्रस्ट संस्था का गठन किया गया था। पिछले कई वर्षों से ट्रस्ट अमरनाथ यात्रा के साथ जुड़ी हुई है। इसमें देशभर से आने वाले साधु संतों के लिए दशनामी अखाड़ा प्रमुख रहा है।