जम्मू के अखनूर में 27 घंटे चली मुठभेड़ में दो और आतंकी ढेर कर दिए गए। आतंकी मंदिर के बेसमेंट में छिपे थे। रातभर निगरानी के बाद सुबह होते ही दो घंटे में सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मार गिराया। एआईवी और यूएवी का इस्तेमाल किया गया।
अखनूर के बट्टल इलाके में 27 घंटे तक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो और आतंकियों को ढेर कर दिया। आतंकी मंदिर की बेसमेंट में छिपे थे। सोमवार रातभर सेना ने आतंकियों को घेरे रखा और इनको बाहर नहीं निकलने दिया। मंगलवार की सुबह होते ही दो घंटे के भीतर ही इनको मार गिराया। आतंकियों के पास से बड़ी संख्या में गोला-बारूद और हथियार बरामद किए गए हैं।
अखनूर के बट्टल इलाके में सेना को आतंकियों के मंदिर में छिपे होने का पता सोमवार को ही चल गया था। शाम ढलते ही आतंकियों ने फायरिंग बंद कर दी। रात का फायदा उठाकर भागना चाहते थे। ऑपरेशन में जुटे अफसरों को इसका ज्ञात हो चुका था, इसलिए अंधेरा होने से पहले ही मंदिर और इसके आसपास करीब 200 मीटर के दायरे में हाईमास्ट लाइटें लगा दी गईं, ताकि इतनी रोशनी हो कि आतंकी भाग न सकें।
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Jammu Akhnoor Terrorists Attack
- फोटो : PTI
आतंकी दो घंटे भी नहीं टिक सके
हुआ भी कुछ ऐसा ही। रातभर सेना और पुलिस ने आतंकियों पर पैनी नजर रखी। जैसे ही मंगलवार की सुबह हुई तो एआई और यूएवी की मदद से आतंकियों पर रॉकेट लांचर दागा गया। इसका आतंकियों ने जवाब दिया। दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई, लेकिन सेना की प्रभावी कार्रवाई के आगे आतंकी दो घंटे भी नहीं टिक सके। एक-एक करके दोनों को मार गिराया गया। एक आतंकी सोमवार को ही मार गया था। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने कई बार भागने का प्रयास किया, लेकिन इनके ऊपर सटीक नजर ने उन्हें बाहर नहीं आने दिया। आतंकी भी मंदिर और इसके पास तेज रोशनी देखकर समझ चुके थे कि उनके ऊपर चारों तरफ नजर है। वे चाहकर भी बाहर नहीं आ सके।
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बड़ी तैयारी के साथ आए थे आतंकी
आतंकियों के पास जिस तरह से गोला-बारूद और सामान बरामद हुआ है। उससे साफ है कि आतंकी बड़े हमले और लंबी मुठभेड़ के लिए आए थे। आतंकियों के पास दर्द निवारक दवाएं, ड्राई फ्रूट, एम4 और एके47 राइफल, पूरी तरह से भरी हुईं मैगजीन मिली हैं। इस सामान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि दहशतगर्द बड़े हमले और अधिक देर तक लड़ने के इरादे से आए थे। इनकी आयु 18 से 20 वर्ष के बीच है, जबकि ये कुछ समय पहले ही प्रशिक्षित हुए थे। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार सुबह आतंकियों ने ऑपरेशन पर मौजूद कुछ सैन्य अफसरों पर ग्रेनेड फेंकने का प्रयास किया। ये सैन्य अफसरों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से आए थे।
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ये हथियार और सामान बरामद
आतंकियों के पास एम4, दो एकके47 राइफल, एम4 की तीन भरी हुईं मैगजीन, भरी हुई सात एके47 की मैगजीन, एक चाइनीज पिस्टल भरी हुई, तीन चाकू, पावर बैंक, एक हैंड ग्रेनेड, एक डिजिटल घड़ी, नोटपैड, तीन कंबल, तीन जोड़ी जूते, ड्राई फ्रूट, दर्द निवारक दवाइयां, बीटाडीन, पट्टियां, तीन बैग, गोला-बारूद रखने वाले पाउच आदि बरामद किए गए हैं। डीआईजी शिव कुमार का कहना है कि आतंकियों के पास जिस तरह से सामान बरामद हुआ है। उससे साफ है कि ये बड़ी तैयारी और बड़े हमले के इरादे से आए थे।
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बट्टल में 27 घंटे चली मुठभेड़, दो और आतंकी ढेर, मंदिर की बेसमेंट में छिपे थे
एसएसपी जम्मू जोगिंदर सिंह ने बताया कि रात भर आतंकियों ने फायरिंग नहीं की। मंगलवार सुबह सात बजे अंतिम हमला किया, लेकिन दो घंटों के भीतर ही दोनों दहशतगर्दों को मार गिराया गया। सैन्य काफिले पर हमला करने वाले तीनों आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है। सेना के मेजर जनरल समीर श्रीवास्तव का कहना है कि आतंकियों को मार गिराने के लिए एआई और मानव रहित वाहन का इस्तेमाल किया गया। इनकी मदद से हमें त्वरित और सफल परिणाम मिले। बीएमपी वाहन का इस्तेमाल करने पर कहा कि हमने उस तरह के वाहन का इस्तेमाल किया था, क्योंकि इलाका कठिन था। 30 डिग्री की ढलान और घना जंगल था।
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डीआईजी जम्मू शिवकुमार का कहना है कि सेना और पुलिस के बीच समन्वय के साथ यह सफलता मिली है। हमने कई बैठकें सेना के साथ की हैं। इसका उद्देश्य यह है कि सेना और पुलिस के बीच समन्वय बना रहे, ताकि हम कहीं भी किसी भी आतंकवादी की मौजूदगी का पता लगाने पर उसे तुरंत अंजाम तक पहुंचा सकें। इसके लिए हमारा तालमेल दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह ऑपरेशन एक ऐसा ही उदाहरण है।
फैंटम को दी श्रद्धांजलि
मुठभेड़ में सेना का श्वान फैंटम भी बलिदान हुआ है। आतंकियों ने फैंटम पर फायरिंग की। सेना ने फैंटम को श्रद्धांजलि दी। फैंटम की भूमिका का सम्मान करते हुए सेना की व्हाइट नाइट कोर ने एक्स लिखा कि हम अपने सच्चे नायक और बहादुर श्वान फैंटम के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं। जब हमारे सैनिक आतंकवादियों के करीब पहुंचे रहे थे, तो फैंटम ने दुश्मन की गोलीबारी का सामना किया, जिससे उसे घातक चोटें आईं। उसकी हिम्मत, वफादारी और समर्पण को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।