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आपदा में उगाही: रसोई गैस सिलेंडर के वितरण में उपभोक्ताओं से छल, जानिए क्या बोले जिम्मेदार

Fri, 30 Apr 2021 05:36 PM IST
प्रशांत कुमार पंकज मिश्रा, कठुआ
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
कोरोना महामारी के दौरान समाज का हर वर्ग जब सरकार की ओर से राहत की आस लगाकर बैठा है, तो वहीं जम्मू संभाग के कठुआ जिले में रसोई गैस सिलेंडर के वितरण में उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे की उगाही का क्रम जारी है। वितरकों की इस कालाबाजारी से प्रशासन अनजान है। वितरकों द्वारा उपभोक्ताओं से सिलेंडर की बिक्री करने के नाम पर ठगी का कारोबार जारी है। वहीं नियमों से अनजान उपभोक्ताओं को अपने साथ हो रही ठगी का पता भी नहीं है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
जिले में रसोई गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं से हर सिलेंडर की बिक्री पर 25 से 30 रुपये अतिरिक्त कमा रहे हैं। यह उनके वितरण कमीशन के अलावा है। यह स्थिति किसी एक कंपनी के वितरण केंद्र की नहीं, बल्कि जिले के सभी केंद्रों का ऐसा ही हाल है। इस पर न तो प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है और न ही तेल कंपनियां उपभोक्ताओं के साथ होने वाले छल को रोकने के लिए आगे आ रही हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
वितरण की इस व्यवस्था पर अगर वितरकों से कोई प्रश्न किया जाता है तो उनका कहना है कि कैश एंड कैरी की व्यवस्था विभाग के गोदाम से होती है। अगर कोई ग्राहक विभाग के गोदाम तक आता है, तो उसे कैश एंड कैरी के हिसाब से रसोई गैस का मूल्य लिया जाता है। जबकि स्थिति यह है कि शहर के वितरकों के गोदाम तो हैं, लेकिन न वहां कोई कर्मचारी और न ही रसोई गैस उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था दिखाई देती है। ऐसे में मजबूर उपभोक्ता को वितरकों द्वारा तय किए गए मूल्य पर रसोई गैस खरीदना मजबूरी बना हुआ है।

 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock
उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की उपलब्ध कराने के लिए दो तरह की व्यवस्था है जिसमें पहली होम डिलीवरी है। जिससे सभी वाकिफ है। वहीं एक अन्य व्यवस्था का भी प्रावधान है जिसे कैश एंड कैरी का नाम दिया गया है। इन दोनों ही व्यवस्था के लिए सरकार द्वारा अलग-अलग मूल्य निर्धारित किए गए हैं। होम डिलीवरी में घर तक रसोई गैस पहुंचाने का खर्च शामिल होता है। अगर कोई उपभोक्ता खुद से रसोई गैस लेने के लिए वितरक के पास आता है तो उसे गैस पहुंचाने के लिए निर्धारित की गई राशि को काटकर कैश एंड कैरी के माध्यम से गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। लेकिन उपभोक्ता इससे पूरी तरह से अनजान है। जिसका लगातार फायदा उठाते हुए वितरकों द्वारा उन्हें हर सिलेंडर होम डिलीवरी के मूल्य पर ही दिया जा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
वितरकों द्वारा की जा रही इस कालाबाजारी से सबसे ज्यादा गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रभावित हो रहे हैं। आपको बता दें कि जिला में केंद्र सरकार की उज्जवला योजना के तहत हजारों गरीब परिवारों को रसोई गैस के कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इस परिवारों के पास एक मात्र सिलेंडर होने के कारण वह होम डिलीवरी की सुविधा नहीं लेते है। जब भी उनका सिलेंडर खाली होता है तो वह खुद वितरण केंद्र पर आते हैं। वहीं कई गरीब परिवार ऐसे भी हैं जिनके पास जब पैसे होते हैं, तो ही वह सिलेंडर को भरवाने के लिए आते हैं।

 
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सांकेतिक तस्वीर
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में जन वितरण विभाग के सहायक निदेशक हारुन राशिद नाइक का कहना है कि जिला में रसोई गैस का वितरण सीधी तौर पर उनके नियंत्रण में नहीं है। हालांकि वह पूरे जिले के प्रभारी है लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नही है कि जिला में कुल कितनी गैस एजेंसियां है और कितने उपभोक्ता इनके ग्राहक है। रसोई गैस के उपभोक्ताओं से किस तरह से मूल्य वसूला जाता है इसके बारे में भी वह पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। अब जानकारी मिली है तो वह इसकी जांच करेंगे। अगर वाकई उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार का छलकपट किया जा रहा है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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