सांकेतिक तस्वीर
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वितरण की इस व्यवस्था पर अगर वितरकों से कोई प्रश्न किया जाता है तो उनका कहना है कि कैश एंड कैरी की व्यवस्था विभाग के गोदाम से होती है। अगर कोई ग्राहक विभाग के गोदाम तक आता है, तो उसे कैश एंड कैरी के हिसाब से रसोई गैस का मूल्य लिया जाता है। जबकि स्थिति यह है कि शहर के वितरकों के गोदाम तो हैं, लेकिन न वहां कोई कर्मचारी और न ही रसोई गैस उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था दिखाई देती है। ऐसे में मजबूर उपभोक्ता को वितरकों द्वारा तय किए गए मूल्य पर रसोई गैस खरीदना मजबूरी बना हुआ है।