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1965 युद्ध: परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद ने अकेले ही ध्वस्त किए थे पाक के 7 टैंक

Sat, 17 Sep 2016 11:16 PM IST
आशुतोष तिवारी, अमर उजाला/जम्मू
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hamid - फोटो : File Photo
1965 के सितंबर महीने में पाकिस्तान ने अपने नापाक मंसूबों को लेकर भारत पर हमला कर दिया था, लेकिन पाकिस्तान ये भूल चुका था कि भारतीय सेना उसके नापाक इरादों को असफल करने के लिए पूरी तरह से तैनात बैठी थी।
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hamid - फोटो : File Photo
आज हम आपको 1965 युद्ध में शहीद वीर जवान अब्दुल हमीद की शाहादत की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आप भी गर्व महसूस करेंगे।
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hamid - फोटो : File Photo
1965 में जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया तो भारत के वीर सपूतों ने मोर्चा संभाला। आठ सितंबर की रात अब्दुल हमीद पंजाब के तरन तारन जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। इसी मोर्चे पर पाकिस्तान ने अपने अपराजेय माने जाने वाले टैंक अमेरिकन पैटन को लड़ाई में उतारा। 

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hamid - फोटो : File Photo
पाक के इन टैंकों ने खेमकरण सेक्टर में हमला कर दिया। देश के वीर सपूत अब्दुल हमीद ने भी भारतीय सैनिकों के साथ मोर्चा संभाला। अब्दुल हामीद के पास बुलंद हौंसलों के सिवाए कोई हथियार नहीं था। 
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hamid - फोटो : File Photo
हामीद बिना अपनी जान की परवाह किए पाकिस्तानी टैंकों के सामने खड़े हो गए। उस वक्त उनके पास सिर्फ गन माउनटेड जीप थी। उन्होंने अपने अनुभव से पाक टैंकों की कमजोरी का पता लगा लिया।
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hamid - फोटो : File Photo
हामीद ने इन्हीं कमजोर हिस्सों पर निशाना साधना शुरू किया और एक-एक कर पाकिस्तानी टैंकों को नेस्तानाबूत करना शुरू कर दिया। उनकी वीरता ने भारतीय सैनिकों में जोश भर दिया। 
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hamid - फोटो : File Photo
हमीद ने अकेले ही पाकिस्तान के 7 टैंकों को ध्वस्त कर दिया। हामीद और उनके साथियों के हौसले के सामने पाक सैनिक ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और वापस लौटने को मजबूर हो गए। वीर हामीद यहां भी नहीं रुके, वो वापस भाग रहे पाक सैनिकों का पीछा करने लगे। इसी दौरान उनकी जीप पर एक बम का गोला आ गिरा। इसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। 10 सितंबर को वे शहीद हो गए। 
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hamid - फोटो : File Photo
सरकार ने अब्दुल हामीद की वीरता को सलाम करते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र और फिर सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा। आज पूरा देश अब्दुल हामीद की वीरता को सलाम कर रहा है।
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