1965 में हुए भारत-पाक युद्ध को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े टैंक युद्घ के तौर पर जाना जाता है । रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 1965 की लड़ाई के दौरान पाकिस्तान की सेना भारतीय सेना से ज्यादा बेहतर स्थिति में थी ।
विज्ञापन
2 of 15
war
- फोटो : File Photo
पाकिस्तान की सेना को रक्षा की तकनीक में अमेरिका का साथ मिला हुआ था । पाक सेना के पास शक्तिशाली पैटन टैंक थे, जिसकी वजह से वह रक्षा तकनीकी के मामले में भारतीय सेना से ज्यादा शक्तिशाली थी ।
विज्ञापन
3 of 15
war
- फोटो : File Photo
पाकिस्तान की इस तकनीक के जवाब में भारत के पास द्वितीय विश्वयुद्ध के टैंको का दस्ता था लेकिन तमाम रक्षा उपकरणों के बावजूद भारतीय सेना के अदम्य साहस के आगे पाकिस्तानी सेना कमजोर पड़ गई ।
4 of 15
war
- फोटो : File Photo
भारतीय शूरवीर अब्दुल हमीद ने अकेले पाकिस्तान के 7 पैटन टैंको को ध्वस्त कर दिया जिसने पाकिस्तान के हौसले तोड़ दिये।
विज्ञापन
5 of 15
war
- फोटो : File Photo
इस लड़ाई में ये साबित हुआ कि युद्ध को सिर्फ हथियारों के बल पर नहीं जीता जा सकता बल्कि युद्घ के नेतृत्व और तकनीकी के इस्तेमाल की क्षमता भी होनी चाहिये जो कि उस समय की पाकिस्तानी सेना के पास नहीं थी ।
विज्ञापन
6 of 15
war
- फोटो : File Photo
विश्व के इतिहास में भारत पाक के बीच हुआ ये युद्ध भारत की साहसिक विजय और सबसे बड़े टैंक युद्घ के तौर पर जाना जाता है ।
विज्ञापन
7 of 15
war
- फोटो : File Photo
पाकिस्तान ने शास्त्री को समझा कमजोर प्रधानमंत्री
1964 में जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री को पाकिस्तान एक कमजोर प्रधानमंत्री के रूप में समझता था।
8 of 15
war
- फोटो : File Photo
दरअसल शास्त्री के पीएम बनने के दो साल पहले ही भारत को चीन से हुई लड़ाई में हार का सामना करना पड़ा था । इस हार के कारण भारतीय सेना का मनोबल कमजोर हो गया था । पाक को ये लगता था कि भारतीय सेना की स्थिति का लाभ उसे जरूर मिलेगा ।
9 of 15
war
- फोटो : File Photo
वहीं दूसरी ओर हार से उबर रही भारतीय सेना को आधुनिकता से जोड़ने की कोशिशें शुरू हुई थी । इस कवायद के बीच पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान और तत्कालीन सेनाध्यक्ष मोहम्मद मूसा ने कश्मीर को हड़पने के मंसूबे से भारत पर हमला करने की योजना बनाने लगे ।
10 of 15
war
- फोटो : ADGPI- Indian Army
पाक हुक्मरान मानते थे कि भारतीय सेना के कमजोर मनोबल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामरिक नजरिये से कमजोर हुए भारत के पर हमले और कश्मीर पर कब्जा करने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता है ।
11 of 15
war
- फोटो : ADGPI- Indian Army
कश्मीरियों को लेकर गलतफहमी में था पाकिस्तान
भारत पर हमले के मंसूबे के बीच पाकिस्तान इस खुशफहमी में था कि भारत के खिलाफ होने वाली उसकी जंग में कश्मीरी लोग उसका साथ देंगे । कश्मीर में घुसपैठ के जरिये भारत पर हमला करने की योजना से पाक ने ऑपरेशन जिब्रालटर की शुरुआत की ।
12 of 15
war
- फोटो : ADGPI- Indian Army
पाक की योजना थी कि कश्मीर में सीमित लड़ाई लड़ी जाए । इसी कारण पाक ने कश्मीरियों को अपने पक्ष में समझते हुए करीब 33 हजार प्रशिक्षित लड़ाकों को हथियारों से लैस कर कश्मीर में घुसपैठ कराई, पर पाक के नापाक मंसूबे की खिलाफत में कश्मीरियों ने भारत का साथ दिया और भारत की सेना को इस घुसपैठ की जानकारी दे दी । यही नहीं कश्मीरी लोगों ने खुद कई घुसपैठियों को पकड़कर भारतीय फौज को सौंप दिया।
13 of 15
war
- फोटो : ADGPI- Indian Army
भारत के ठोस पलटवार से पाक के इरादे हुए ध्वस्त
कश्मीर पर हमले के बाद भारत की सेना ने पूरे दमखम के साथ पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करना शुरू किया । भारतीय सेना पीओके में उन क्षेत्रों को निशाना बनाने में जुट गई जहां से पाक की फौज को मदद मिल रही थी । इस कार्रवाई में हाजीपीर में मोर्चे पर रही पाक की सेना को मुंह की खानी पड़ी ।
14 of 15
war
- फोटो : File Photo
इस दबाव से बचने के लिये पाक सेना ने अखनूर में ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम की शुरूआत की । पाक अखनूर ब्रिज पर कब्जा करके भारतीय सेना को पहुंचने वाली मदद को रोकना चाहता था क्योंकि अखनूर ब्रिज पर कब्जा हो जाने की स्थिति में भारत के लिए कश्मीर में युद्घ लड़ना काफी मुश्किल हो सकता था लेकिन सैनिकों की कुशल कूटनीति के बल पर भारत ने पंजाब में पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया ।
वहीं पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के दौरान कई नासमझी भरे कदम उठाये । भारत को पंजाब के रास्ते पाक की ताकत पर प्रहार करने और पाकिस्तान की गलतियों का फायदा मिल गया जिसके कारण भारत की फौज ने पाकिस्तान को कश्मीर से वापस चले जाने के लिये मजबूर कर दिया।