19 जनवरी 1990 कश्मीरी पंडितों का पलायन
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तिकू के अनुसार उसी रात जब ‘यहां क्या चलेगा निजाम-ए-मुस्तफा’, ‘ए जालिमों ए काफिरों कश्मीर हमारा छोड़ दो’ जैसे नारे बुलंद किए गए, तो कश्मीरी पंडितों में एक भय सा पैदा हो गया कि आखिर अब क्या होगा। वो रात कभी नहीं भूलती, क्योंकि वह रात मानो तारे गिनते हुए काटी हो। जब सुबह हुई तो माहौल खौफनाक था।