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Srinagar: बर्फ के नीचे छाया में छिपी मछलियों की तलाश; मछलियां पकड़ने की अनूठी परंपरा, देंखे इन तस्वीरें में

Fri, 10 Jan 2025 12:28 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

कश्मीर के आंचर झील में मछुआरे की प्राचीन छाया मछली पकड़ने की परंपरा को सर्दियों में जारी रखते हुए जीविका कमाते हैं, जबकि झील के प्रदूषण और भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
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Kashmir fishing - फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर शहर के सोरा क्षेत्र स्थित आंचर झील में कश्मीर के मछुआरे प्राचीन छाया मछली पकड़ने की परंपरा को फिर से अपनाने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह पारंपरिक मछली पकड़ने की विधि खासतौर पर आंचर झील से जुड़ी हुई है, जहां मछुआरे सुबह जल्दी अपनी नावों को झील के जम चुके हिस्से से होते हुए मछली पकड़ने के लिए ले जाते हैं और फिर हार्पून से मछलियां पकड़ते हैं।
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Kashmir fishing - फोटो : बासित जरगर
छाया मछली पकड़ने की यह प्रथा जम्मू और कश्मीर के डोगरा शासन के दौरान 20वीं सदी की शुरुआत से चली आ रही है और यह विशेष रूप से दिसंबर और जनवरी के महीनों में, जब कश्मीर में सर्दी अपने चरम पर होती है तब पकड़ी जाती है।
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Kashmir fishing - फोटो : बासित जरगर
शकीर अहमद जो आंचर के एक मछुआरे ने कहा मैं सुबह 8 बजे मछली पकड़ने जाता हूं, और मुझे झील के जम चुके हिस्से को पार करना पड़ता है। रात के तापमान में गिरावट के कारण झील जम जाती है, और कभी-कभी हमें अपने मछली पकड़ने के क्षेत्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है। यह हमें आजीविका देती है। हम दिन में 300 से 1000 रुपये तक कमाते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि हमें कितनी मछलियां मिलती हैं।

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Kashmir fishing - फोटो : बासित जरगर
यह प्रथा आज भी कश्मीर की जल निकायों में विशेष रूप से आंचर झील में प्रचलित है क्योंकि आधुनिक विधियों से सर्दियों के मौसम में इन जल निकायों से ज्यादा मछलियां नहीं पकड़ी जातीं।छाया मछली पकड़ने में मछुआरे अपनी नाव के किनारे पर एक छाया बनाते हैं, इसके लिए वे अपने आप को एक कंबल या घास से बने छायादार छतरी के नीचे छिपा लेते हैं, ताकि मछलियों को आकर्षित किया जा सके। फिर वे हार्पून से मछलियों को पकड़ते हैं।
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Kashmir fishing - फोटो : बासित जरगर
हालांकि, आंचर झील के मछुआरे अपनी आने वाली पीढ़ी को इस पेशे में नहीं लाना चाहते। इमरान मजीद, एक स्थानीय मछुआरे ने कहा मेरा बेटा मछली पकड़ने के लिए नहीं आता। वह झील को गंदा कहता है और अक्सर कहता है कि मछली पकड़ने में भविष्य नहीं है। मैं भी उसे इस काम के लिए मजबूर नहीं करता क्योंकि मुझे लगता है कि अगले 5-6 साल में यह झील अब नहीं रहेगी, क्योंकि हम इसे प्रदूषित कर रहे हैं।
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