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Muharram in Srinagar: डल झील में काले वस्त्र पहनकर निकाली नौका रैली, देखें तस्वीरें

Tue, 09 Aug 2022 03:27 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

श्रीनगर की विश्व प्रसिद्ध डल झील में अनोखी नौका रैली का आयोजन किया गया। डल झील के अंदरूनी इलाकों से गुजरने वाली इस रैली में कई शिकारे शामिल हुए, जिसमें काले वस्त्र पहनकर शिया समुदाय के लोग शामिल हुए।
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Muharram in Srinagar - फोटो : बासित जरगर
मुहर्रम पर श्रीनगर, बडगाम, मागाम, नारबल के साथ-साथ घाटी के अन्य इलाकों में मातमी जुलूस निकाले गए। श्रीनगर की विश्व प्रसिद्ध डल झील में अनोखी नौका रैली का आयोजन किया गया। डल झील के अंदरूनी इलाकों से गुजरने वाली इस रैली में कई शिकारे शामिल हुए, जिसमें काले वस्त्र पहनकर शिया समुदाय के लोग शामिल हुए।
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Muharram in Srinagar - फोटो : बासित जरगर
रैली में शामिल स्थानीय निवासी ने बताया कि यह मातमी रैली पिछले कई दशकों से डल झील के अंदरूनी इलाकों से निकाली जाती है। इसमें सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। रैली इमाम बाड़ा पहुंचती है। इस दौरान शिया समुदाय के लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और मातम मनाते हैं। 
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Muharram in Kashmir - फोटो : बासित जरगर
मुहर्रम गम और मातम का महीना है, जिसे इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग मनाते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, मुहर्रम इस्लाम धर्म का पहला महीना होता है। यानी मुहर्रम इस्लाम के नए साल या हिजरी सन् का शुरुआती महीना है। मुहर्रम बकरीद के पर्व के 20 दिनों के बाद मनाया जाता है। इस बार मुहर्रम का महीना 31 जुलाई से शुरू हुआ है। ऐसे में 9 अगस्त को आशूरा या मुहर्रम मनाया जा रहा है। 

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Muharram 2022 - फोटो : बासित जरगर
इस्लाम धर्म के लोगों के लिए यह महीना बहुत अहम होता है, क्योंकि इसी महीने में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। हजरत इमाम हुसैन इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे थे। उनकी शहादत की याद में मुहर्रम के महीने के दसवें दिन को लोग मातम के तौर पर मनाते हैं, जिसे आशूरा भी कहा जाता है।
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Muharram in Srinagar - फोटो : बासित जरगर
मुहर्रम के 10वें दिन यानी आशूरा के दिन ताजियादारी की जाती है। इमाम हुसैन की इराक में दरगाह है, जिसकी हुबहू नकल कर ताजिया बनाई जाती है। शिया उलेमा के मुताबिक, मोहर्रम का चांद निकलने की पहली तारीख को ताजिया रखी जाती है। इस दिन लोग इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिया और जुलूस निकालते हैं। हालांकि ताजिया निकालने की परंपरा सिर्फ शिया समुदाय में ही होती है।
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Muharram in Kashmir - फोटो : बासित जरगर
इस्लाम धर्म की मान्यता के मुताबिक, हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ मोहर्रम माह के 10वें दिन कर्बला के मैदान में शहीद हो गए थे। उनकी शहादत और कुर्बानी के तौर पर इस दिन को याद किया जाता है।
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