जम्मू-कश्मीर सरकार ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर चिनार के पेड़ों को संरक्षित करने के लिए जियो-टैगिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य चिनार के पेड़ों की निगरानी और संरक्षण को मजबूत करना है।
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चिनार पेड़ों का डिजिटल संरक्षण
- फोटो : बासित जरगर
ताकि इनकी भौतिक स्थिति का सही डेटा एकत्र किया जा सके और इनके संरक्षण के लिए कदम उठाए जा सकें।
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गुरुवार को कश्मीर में इस प्रक्रिया की शुरुआत वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सैयद तारिक ने की। डॉ. तारिक ने बताया कि चिनार पेड़ ऑक्सीजन उत्पादक होते हैं और इनकी अपनी पारिस्थितिकी प्रणाली होती है।
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जो कश्मीर की पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस परियोजना का उद्देश्य चिनार के पेड़ों के स्टॉक पर निगरानी रखना और उन्हें एक डिजिटल पहचान देना है, ताकि हर पेड़ की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सके।
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जियो-टैगिंग के तहत प्रत्येक चिनार पेड़ को एक विशिष्ट आधार नंबर प्रदान किया गया है। जो डिजिटल इंडिया की तकनीकी पहल से जुड़ा हुआ है।
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अब तक, 28,560 चिनार पेड़ों को जियो-टैग किया गया है और उनकी भौतिक विशेषताओं को एकत्र किया गया है।
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इन पेड़ों को क्यूआर कोड के साथ लॉक कर दिया गया है, जिसे स्कैन करने पर उपयोगकर्ता उस पेड़ के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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वन विभाग ने सेव चिनार अभियान के तहत इस पहल को और भी बढ़ावा देने की योजना बनाई है।
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जिससे चिनार के पेड़ों के संरक्षण के लिए एक डेटाबैंक तैयार किया जाएगा। डॉ. तारिक ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है और जल्द ही इस डेटा को सार्वजनिक डोमेन में लाया जाएगा।