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देखिए कश्मीर की जन्माष्टमी : श्रीनगर में गूंज उठा हरे कृष्णा, रथ यात्रा ने बिखेरा सौहार्द और आस्था का रंग

Sun, 17 Aug 2025 01:01 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क श्रीनगर

सार

श्रीनगर में इस्कॉन ने जन्माष्टमी पर पारंपरिक शोभायात्रा निकाली, जिसमें कश्मीरी हिंदू और मुस्लिम समुदाय ने मिलकर भाग लिया, रथयात्रा में कीर्तन, नृत्य और भक्ति का माहौल देखने को मिला।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
दुनियाभर में इस्कॉन श्रीकृष्ण की भक्ति का वाहक है, वहीं यह कश्मीर में सद्भावना का संवाहक भी बना हुआ है। 1996 में डाउनटाउन स्थित श्री कथलेश्वर मंदिर में स्थापना के बाद से ही यह हर साल जन्माष्टमी पर शील प्रभुपाद की शोभायात्रा निकालता है। शोभायात्रा की तैयारी से लेकर रथयात्रा के सारथी के तौर पर कश्मीरी मुस्लिम इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।कश्मीर में 90 का दशक आतंक के सबसे काले दौर के तौर पर जाना जाता है।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
वहीं इसी दशक में यहां इस्कॉन की स्थापना हुई। इस्कॉन से जुड़े पंडित जगदीश भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 1996 से पहले भी इस्कॉन यहां अपना प्रचार करता था। डॉ. फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल के दौरान हमने श्री कथलेश्वर मंदिर में इस्कॉन की स्थापना की। तब से प्रचार और शोभायात्रा लगातार निकल रही है।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
उन्होंने बताया कि इस्कॉन के संचालन और गतिविधियों में स्थानीय कश्मीरी समुदाय का भी काफी सहयोग रहता है। शनिवार को जन्माष्टमी पर निकाली शोभायात्रा के लिए बग्घी का इंतजाम किया। सजावट में सहयोग किया, और तो और प्रभु की यात्रा का सारथी भी एक कश्मीरी मुस्लिम ही था।

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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
श्रीनगर की ही कश्मीरी पंडित और इस्कॉन से जुड़ी अनीता चंदपुरी ने बताया कि हमें तो जन्माष्टमी की प्रतीक्षा रहती ही है, कश्मीरी समुदाय भी बेसब्री से इंतजार करता है। यात्रा की सजावट से लेकर स्वागत तक में कश्मीरी भाइयों का सहयोग रहता है।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
इस्काॅन के कार्यालय में ही एक किताबों का स्टॉल भी है। यहां श्रीकृष्ण पर उर्दू में लिखी किताबें उपलब्ध हैं। शनिवार को दो किताबें यहां रखी मिलीं। एक किताब है ‘श्रीकृष्ण-खजाना ए मसर्रत’ और दूसरी ‘तहजीब और रूहानियत’। इस्कॉन के सेवकों ने बताया कि यहां लोग कश्मीरी,अंग्रेजी और उर्दू ही समझते हैं। ऐसे में प्रचार के लिए श्रीकृष्ण की जीवनी और उनके विचारों पर उर्दू में किताबें प्रकाशित कर बांटते हैं।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
डाउनटाउन स्थित श्री कथलेश्वर मंदिर में जन्माष्टमी के उपलक्ष में इस्कॉन की ओर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसी के तहत शनिवार को सुबह करीब साढ़े 11 बजे मंदिर से रथयात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से परिक्रमा करते हुए दोपहर करीब 3 बजे वापस मंदिर पहुंची। रास्तेभर श्रद्धालु कीर्तन करते और नाचते नजर आए। लाल चौक पर श्रद्धालुओं के हरे कृष्णा के जयकाराें से आकाश गूंज उठा।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
मंदिर के सेवक अभिमन्यु दास ने बताया कि मंदिर में तीन दिन से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को जन्माष्टमी के अवसर पर इस्कॉन के संस्थापक शील प्रभुपाद की शोभायात्रा निकाली गई।

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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
शोभायात्रा श्री कथलेश्वर मंदिर से हब्बकदल, बारबर शाह, श्रीराम मंदिर, रीगल चौक, लाल चौक, हरी सिंह स्ट्रीट, डीसी ऑफिस रोड, टंकी पोरा हाेती हुई वापस श्री कथलेश्वर मंदिर पहुंची। इस दौरान श्रद्धालु लगातार कीर्तन करते रहे। पुरुष, महिलाएं और बच्चे नाचते-गाते शोभायात्रा में शामिल हुए। लाल चौक के घंटाघर पर शोभायात्रा कुछ देर रुकी और यहां प्रवचन और कीर्तन हुआ।

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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
शोभायात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। शनिवार सुबह से ही मंदिर से लेकर पूरे यात्रा मार्ग पर सुरक्षाबल तैनात थे। शोभायात्रा से पहले मंदिर के आसपास का यातायात परिवर्तित किया गया। इसके बाद यात्रा जहां भी पहुंचती, उससे पहले ही वहां का यातायात रोक दिया गया। कश्मीरी लोग और पर्यटक दोनों ही शोभायात्रा के दौरान अभिभूत दिखे। स्थानीय लोगों ने बताया कि काफी समय बाद यात्रा में इतने श्रद्धालु दिखाई दिए हैं। 

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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
पर्यटक भी हुए निहाल (चंडीगढ़ के परिवार की फोटो)इस्कॉन की रथयात्रा जब लाल चौक पहुंची तो यहां मौजूद पर्यटक भी हैरत में रह गए। उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि इस तरह का नजारा उन्हें यहां देखने को मिलेगा। चंडीगढ़ से परिवार के साथ आये अभिषेक ने बताया कि उम्मीद नहीं थी कि यहां आकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। बहुत अच्छा लग रहा है यहां, बच्चों ने तो कीर्तन के साथ डांस भी किया। उनकी पत्नी बोलीं तीन दिन से यहां हैं, कश्मीरी लोग काफी अच्छे मेहमान नवाज हैं। वहीं दिल्ली की एक अन्य पर्यटक सोनाली ने बताया कि कश्मीर के बारे में काफी नकारात्मक खबरें सोशल मीडिया पर चलती रहती हैं, यहां आए तो देखा माहौल बिल्कुल अलग है। यहां शोभायात्रा में शामिल होने की तो उम्मीद ही नहीं थी।
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श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव - फोटो : बसित जरगर
पांच साल से मंदिर से जुड़ी हुई हूं। यहां आने से काफी शांति मिलती है। प्रभु की इच्छा से ही आज यहां यात्रा निकल रही है। काफी पुराना मंदिर है। हमारे कश्मीरी भाई भी शोभायात्रा का स्वागत करते हैं, व्यवस्थाओं से भी जुड़ते हैं।  पंपो, श्रीनगर
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