यहां हाथियों के लिए एक विशेष गांव बसाया हुआ है, जिसमें आप आराम से घूम-फिर सकते हैं और उनके साथ पूरा दिन बिता सकते हैं...
ये हाथी गांव राजस्थान की राजधानी जयपुर में ही है, जिसे आप पिंकसिटी के नाम से भी जानते हैं। आमेर के पास दिल्ली रोड पर हाथियों के रखने की व्यवस्था की गई। इस गांव को देखने देश-विदेश के सैलानी आते हैं और ये तेजी से एक नया टूरिस्ट प्वाइंट बनता जा रहा है। देश के एक मात्र इस हाथी गांव के अंदर जाने के लिए मामूली सा शुल्क तय किया हुआ है। टिकट प्रणाली के तहत भारतीय पर्यटक से 50 रुपए और विदेशी पर्यटक से 300 रुपए प्रवेश शुल्क लिया जाता है।
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पानी में हाथियों की अठखेलियों से लेकर फोटो खिंचाने तक का रोमांच
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हाथी गांव
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2008 में राजस्थान सरकार ने इस गांव का नाम रख दिया 'हाथी गांव'। ये हाथी गांव 100 एकड़ में फैला हुआ है। वर्तमान में हाथी गांव में 47 हथिनियां और 4 हाथी हैं। इस गांव में हाथियों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा और मनोरंजन समेत तमाम तरह सुख-सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। यहां पर हाथियों के साथ पर्यटक फोटो खिंचवा सकते हैं और उनकी अठखेलियां भी नजदीक से देख सकते हैं।
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हाथी की सेवा के साथ महावत भी उठाते हैं पूरा लुत्फ
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हाथी गांव
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटकों ने टिकट लेकर हाथी गांव की सैर का लुत्फ उठाना शुरू कर दिया है। पर्यटकों से प्राप्त आय हाथी वेलफेयर सोसायटी के खाते में जमा करवाई जाती है, जिसे हाथी गांव के डेवलपमेंट में खर्च किया जाता है। यहां हाथियों के लिए स्वीमिंग पूल हैं, जिनमें नहाते हुए और महावतों को हाथियों को नहलाते हुए देखा जा सकता है। पूल में उतरकर हाथी घंटों मस्ती करते हैं। सैलानी भी पूल में उतर जाते हैं। यहां इन हाथियों के रहने के लिए थान बने हुए हैं। एक ब्लॅाक में तीन थान हैं, और इस गांव में कुल मिला कर 20 ब्लॉक हैं।
महावत की मेहनत, मजे में गजानन, यहां आम हैं ये नजारे
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हाथी गांव
- फोटो : अमर उजाला
हाथी गांव में हाथियों को मौसम के अनुसार खाना दिया जाता है। हाथियों को चारे के साथ गन्ना, हरा चारा, केले, गुड़ और घी दिया जाता है। एक हाथी एक दिन में तकरीबन 200 से 250 किलोग्राम तक चारा खाता है। राजस्थान सरकार की ओर से हाथियों के स्वास्थ्य की देख-रेख के लिए 4 डॉक्टरों की टीम लगाई गई है, जो प्रतिदिन आकर हाथियों का चैकअप करती है। यह गांव देश का एक मात्र हाथी गांव है, जहां पर असम, केरल एवं अन्य स्थानों से हाथी लाए जाते रहे हैं।
देश आजाद होने के बाद जब आमेर फोर्ट को सरकार ने आम लोगों के लिए खोला, तो यहां एलिफेंट राइडिंग लोगों के बीच खासी लोकप्रिय हुई। एक हाथी दिन में दो-बार आमेर किले की राइडिंग करता है। सुबह ये हाथी गांव से आमेर किले के लिए निकलते हैं और फिर लौट आते हैं। प्रत्येक हाथी के कान के पास एक माइक्रोचिप लगाई जाती है, जिससे महावत अपने हाथी को आसानी से पहचान सकें। इस चिप में हाथी का नाम और सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर फीड होता है।