यौन शोषण के आरोपों में फंसे रामानुजाचार्य कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी बाबा से जुड़े कई रोचक किस्से भी हैं जो उन्हें हमेशा से ही भक्तों के बीच सुर्खियों में रखते हैं। यहां तक कि दूर-दूर से लोग इन किस्सों के पीछे की हकीकत जानने उनके पास पहुंचते थे।
बताया जाता है कि बाबा किसी भक्त को छूता नहीं है, बल्कि हमेशा अपने साथ डंडा रखता है।यदि किसी भक्त को आशीर्वाद देना होता तो वह डंडे के स्पर्श से ही आशीर्वाद देता। यहां तक कि बाबा के पैरों को छूने की भी इजाजत किसी को नहीं दी जाती। केवल गुरुपूर्णिमा के दिन ही बाबा के भक्त उसके पैर छूते।
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भक्तों को ये शिक्षा
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फलाहारी बाबा
- फोटो : amar ujala
भक्त उसके नाम को लेकर ही आश्रम तक खिंचे चले आते हैं। दरअसल उसके नाम में फलाहारी शब्द जुड़ा है। लोगों के अनुसार फलाहारी से सीधा अर्थ ये है कि बाबा खुद भी भोजन के रूप में केवल फलाहार का सेवन करता है। यहां तक कि पीने के लिए गंगाजल को श्रेष्ठ बताता है।
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आश्रम बनाकर जमाया और प्रभाव
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फलाहारी बाबा
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फलाहारी बाबा अपने भक्तों को भी फलाहार और गंगाजल का सेवन करने की सलाह देता। बाबा मूलत: तो उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला है, लेकिन उसने अलवर में आश्रम बनाकर यहां अपना प्रभाव जमाया। बताया जाता है कि वर्ष 1988 में बाबा यूपी से अलवर आया।
अच्छी बारिश के लिए ये समाधि
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फलाहारी बाबा
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बारिश के दौरान भी बाबा सुर्खियां बटोरने में पीछे नहीं रहता। इलाके में अच्छी बारिश हो इसलिए वे जल में समाधि लगाता है। कहा जाता है कि उसके समाधि लगाने के बाद अच्छी बरसात होती। हालांकि, सच्चाई क्या है ये तो वह ही जानता है।
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वेद विद्यालय तक बनाया
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फलाहारी बाबा
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फलाहारी बाबा ने राजस्थान के अलवर में स्थित काला कुआं इलाके में अपना आश्रम बनाया। यहां करीब दो साल पहले ही बाबा ने आश्रम के पास में श्रीवेंकटेश तिरूपति बालाजी दिव्य धाम का निर्माण कराया। बाबा ने 2004 में रामकिशन कॉलोनी में वेद विद्यालय खोला।
पूछताछ के लिए पहुंची आरोप लगाने वाली पीड़िता
- फोटो : amar ujala
उधर, पीड़िता के पिता का कहना है कि बाबा शादीशुदा है और इसके एक बेटी भी है। उन्होंने बाबा का असली नाम शिवपूजन गौतम मिश्र बताया। बाबा की बड़ी बहन का बेटा जो इसका भांजा है उसका नाम सुदर्शनाचार्य है। वह यहां आश्रम में छोटे महाराज के नाम से जाना जाता है।