यूं तो नवरात्रि पर मां के पूजन के लिए कई तरह की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस बार एक ऐसी अनोखी प्रतिमा बनाई गई है, जिसमें गंगा की पावन मिट्टी के साथ-साथ 21 लाख चावल के दानों का इस्तेमाल भी किया गया है। इस मूर्ति को बनाए जाने के पीछे एक पूरी कहानी भी है और मेहनत भी। बताते हैं कि कैसे और क्यों तैयार की गई है ये प्रतिमा...
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साढ़े छह फुट की है प्रतिमा
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प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
पं. लोकनाथ दाधीच ने इस मूर्ति को तैयार करवाया है। उनका कहना है कि ये मूर्ति साढ़े छह फुट ऊंची बनाई गई है। इसे बनाने के लिए गंगा की मिट्टी को लाया गया। उसके बाद करीब 25 किलो चावलों का इस्तेमाल किया गया।
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बंगाल से आए कारीगर
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माता की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
दाधीच ने बताया कि इस मूर्ति को बनाने में बंगाल से आए दो कारीगर जुटे हुए थे। महज सात दिनों में दोनों कारीगरों ने दिन-रात काम करके इस मूर्ति को तैयार किया और इसका सुंदर रूप निखार दिया।
चालीस हजार रुपए की लागत
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चावल से बनी मूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
पहले मिट्टी से यह प्रतिमा बनाई गई और उसके बाद इन्हें केलीकाल नामक कैमिकल से चावलों को चिपकाया गया है। इसमें पच्चीस किलो चावल और करीब 21 लाख चावलों के दानों का इस्तेमाल किया गया है। मूर्ति को बनाने में करीब चालीस हजार रुपए की लागत आई है।
दाधीच ने बताया पीओपी की जगह मिट्टी और चावलों का उपयोग कर इस प्रतिमा को बनाकर भक्ति के साथ ही पर्यावरण को बचाने का भी संदेश दिया गया है। अपनी तरह का यह अनोखा प्रयोग है। इसकी चर्चा भी हो रही है।