राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बजट पढ़ना शुरू किया। जैसे-जैसे बजट आगे बढ़ता गया बीच-बीच में कविताओं के अंश और शायरियां भी सुनने को मिली। कुछ शायरियों ने जहां सरकार के नजरिए को बताया तो कुछ ने तालियां बटोरी। सीएम राजे ने अपने इरादों को भी इन्हीं शायरी से जताया। जानिए क्या क्या कहा मुख्यमंत्री राजे ने।
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तिनका तिनका उठाना पड़ता है
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vasundhara raje
मंजिल यूं ही नहीं मिलती दोस्त,
एक जुनून जगाना पड़ता है।
पूछा चिड़िया से घौंसला कैसे बनता है
बोली तिनका तिनका उठाना पड़ता है।
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जहां कश्तियां ज़िद पर होती है
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vasundhara raje
यह मंजिल बड़ी जिद्दी होती है, हासिल कहां नसीब से होती है।
मगर वहां तूफान भी हार जाते हैं, जहां कश्तियां ज़िद पर होती है।
...बेहतर करुं तो फर्क पड़ता है
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वसुंधरा राजे
मैं किसी से बेहतर करुं तो क्या फर्क पड़ता है
मैं किसी के लिए बेहतर करुं तो फर्क पड़ता है।