हठधर्मिता अब मरीजों की जान ले रही है। लेकिन सरकार और चिकित्सक दोनों ही पांव पीछे खींचने को तैयार नहीं है। दरअसल राजस्थान में बीते तीन दिन से एक बार पुन: स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हैं। बीते माह की तर्ज पर अब भी राजस्थान सेवारत चिकित्सा संघ के बैनर तले दस हजार सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर हैं। नतीजतन सोमवार को राजस्थान में अलग-अलग जगह पांच मरीजों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया।
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मरीजों के लिए बेपरवाह हुए दोनों पक्ष
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अस्पताल में मरीज
मृतकों में एक 15 दिन का बीमार नवजात और एक बालिका भी सम्मलित है। वहीं दोनों पक्षों की हठधर्मिता के कारण लाखों मरीजों प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में भगवान भरोसे है। हालांकि राजस्थान सरकार ने चिकित्सकों की हड़ताल के चलते रेस्मा लागू किया हुआ है। लेकिन इसका खासा असर दिखाई नहीं दे रहा है।
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रेजिडेंट्स के कारण बढ़ी परेशानियां
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डॉक्टर हड़ताल
हड़ताली चिकित्सक गिरफ्तारी के डर से भूमिगत हो गए हैं। वहीं हड़ताल चिकित्सकों के समर्थन में प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट्स भी आ गए हैं। गौरतलब है कि बीते माह भी सात दिन चली चिकित्सकों की हड़ताल ने 30 मरीजों की जान ले ली थी। हड़ताली चिकित्सकों का आरोप है कि बीते माह हुए समझौते को सरकार अभी तक लागू नहीं किया है।
चिकित्सा व्यवस्थाओं का बुरा हाल
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मुश्किल में मरीज
साथ ही सरकार चिकित्सक नेताओं के जबरन तबादले कर रही है। यह भी इस बार की हड़ताल का कारण बना है। वहीं राजस्थान के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ समस्या का हल निकालने के स्थान पर सिर्फ बयानबाजी कर रहे है। मंत्री की कोरी बयानाबाजी से मरीजों में खासा रोष है। जयपुर के प्रमुख सरकारी अस्पताल एसएमएस में तो सरकार के तमाम दावों के बाद भी सोमवार को ही व्यवस्थाएं चरमरा गई।
सीनियर चिकित्सकों के भरोसे मरीज ईलाज के लिए कई घंटों तक लाइनों में लगे रहे लेकिन उनका नंबर नहीं आ सका। वहीं बार बार हो रही हड़ताल ने सरकार के रवैये पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। बीते पूरे सप्ताह राजस्थान सरकार चार वर्ष पूर्ण होने का जश्न मनाती रही और प्रदेश के लाखों मरीजों को नजरदांज करती रही।