सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए आगामी चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है। राजस्थान में संभवत: फरवरी में होने वाले उपचुनावों में उसकी जीत में बाधा उसके अपने नेता ही साबित हो सकते है।
वहीं विकास का दावा करने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए बीते कुछ माह में लिए गए फैसले उसके लिए उल्टे ही साबित हुए है। उम्मीद की जा रही है कि चुनाव आयोग जल्द ही राजस्थान में होने वाले दो लोकसभा व एक विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए तारीख का ऐलान कर सकता है।
लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार अपने नेताओं की बयानबाजी और गलत साबित हुए निर्णयों में ही उलझ कर रह गई है। वहीं कांग्रेस ने उपचुनाव की ना केवल तैयारियां प्रारंभ कर दी है अपितु अलवर लोकसभा चुनाव केलिए उम्मीदवार का भी ऐलान कर दिया है।
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ये बने है भाजपा के लिए सिरदर्द
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ज्ञानदेव आहूजा
हाल ही गो-तस्करों के खिलाफ विवादास्पद बयान देकर सुर्खियों में आए भाजपा के रामगढ़ से विधायक ज्ञानदेव आहूजा अलवर चुनाव में पार्टी के परेशानी बन सकते है। क्योंकि अलवर सीट में मेव समाज के वोट जीत और हार में अहम भूमिका निभाते है।
वहीं अलवर में ही राज्य सरकार में मंत्री हेमसिंह भडाना के पुत्रों की खुलेआम दादागिरी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। इसके अतिरिक्त अलवर में स्थानीय भाजपा नेताओं में गुटबाजी भी किसी से छिपी नहीं है। वहीं अजमेर लोकसभा उपचुनाव में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।
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सीनियर भी पार्टी के लिए मुसीबत है
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भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी
- फोटो : Amar Ujala
भाजपा के वरिष्ठ विधायकों में से एक घनश्याम तिवाड़ी वसुंधरा सरकार के खिलाफ चार वर्षों से मोर्चा खोले हुए है। हाल ही में उन्होंने नई पार्टी बनाने का भी ऐलान किया है। इतना ही नहीं वे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ भी बयानबाजी कर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे है। इसी फेहरिस्त में एक नाम कोटा से विधायक भवानी सिंह राजावत का भी है। कोटा विधायक राज्य सरकार के साथ केन्द्र सरकार के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखते है।
सरकार के अधिकतर दांव उलटे
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किरोड़ी सिंह बैंसला
वसुंधरा सरकार बीते कुछ माह में किए गए विवादास्पद निर्णयों के कारण देश ही दुनियाभर की मीडिया में छाई रही है। इन निर्णयों मे फिर चाहे नौकरशाहों व राजनेताओं के बचाने वाला बिल हो। या फिर कथित गो-तस्कर पहलू खान की हत्या का मामला।
वहीं दो माह में दो बार चिकित्सकों की राज्यव्यापी हड़ताल और 100 से अधिक लोगों की मौत ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए है। वहीं हाल ही में गुर्जर आरक्षण पर किए गए निर्णय को लेकर भी गुर्जर समुदाय ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार में कलह इस कदर है उपचुनावों के लिए अभी तक पार्टी उम्मीदवारों का भी निर्णय नहीं कर सकी है। गौरतलब है कि अलवर व अजमेर की लोकसभा सीट अभी तक भाजपा के कब्जे में थी।
वहीं मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर भी भाजपा विधायक ही काबिज था। लेकिन उपचुनाव के परिणाम जरुर अलग होंगे। क्योंकि राजनीति जानकार कहते है कि पार्टी में आपसी खींचतान का असर उपचुनाव में जरुर देखने को मिलेगा।